लखनऊ उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को ग्रामीण रोजगार का सशक्त माध्यम बनाते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा संचालित टेक होम राशन (टीएचआर) इकाइयों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देकर न केवल विद्युत व्यय में कमी लायी जा रही है, बल्कि उनकी आमदनी में भी इजाफा हुआ है।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने निर्देश दिए हैं कि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के संचालन में महिलाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि वे अपने उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं द्वारा विभिन्न जिलों में टीएचआर इकाइयों का संचालन किया जा रहा है, जिसमें अब सौर ऊर्जा की सहायता से बिजली का खर्च घटाया जा रहा है।मिशन निदेशक दीपा रंजन के अनुसार, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के समन्वय से 49 टीएचआर इकाइयों पर 75 किलोवाट सोलर पावर प्लांट लगाए जाने का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे हाल ही में कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्वीकृति मिली। अद्यतन प्रगति रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 25 इकाइयों पर सौर ऊर्जा संयंत्र पूर्ण रूप से चालू हो चुके हैं।
इन 25 इकाइयों में से 13 को प्रथम व द्वितीय किश्त के रूप में कुल 587.01 लाख रुपये, 6 इकाइयों को प्रथम किश्त के रूप में 135.60 लाख रुपये, यानी कुल 722.60 लाख रुपये की अनुदान राशि प्रदान की जा चुकी है। बाकी 6 इकाइयों को द्वितीय किश्त के भुगतान की प्रक्रिया प्रगति पर है।अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीना ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति–2023 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बिजली आपूर्ति के लिए 75 केवीए तक की सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर सब्सिडी प्रदान की जाती है। सामान्य इकाइयों को लागत का 50 प्रतिशत, जबकि महिला स्वामित्व वाली इकाइयों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।उल्लेखनीय है कि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है और ये अधिकतर नियोजित औद्योगिक क्षेत्रों की सीमा के बाहर संचालित होते हैं। ऐसे में सौर ऊर्जा के माध्यम से इन इकाइयों को सशक्त बनाना न केवल ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देता है, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी अनुकूल कदम है।इस परियोजना से जहां महिला उद्यमियों को लाभ हुआ है, वहीं सरकार की ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ की दिशा में एक अहम पहल भी सिद्ध हो रही है। उप मुख्यमंत्री मौर्य की इस पहल से प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती मिल रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार मिल रहा है।