जिंदगी में कुछ लम्हें ऐसे भी आते हैं जब हमें यह एहसास होता है कि हम किसी के लिए कितने जरूरी हैं और शायद उतने भी नहीं जितना हमें लगता है, हम हैं या नहीं इससे किसी को कुछ फर्क़ नहीं पड़ता है l इसी को माया कहते हैं l
बात है अभी शनिवार 31 मई की, मैने ग्वालियर से दुर्ग तक की ट्रेन ली l यूँ तो सफर लंबा था पर मुझे नहीं लग रहा था क्यूंकि यात्रा करना मुझे बहुत पसंद है l
सोचा अकेली हूं, किताब पढ़ लूँगी, कविताएं लिखूँगी,खुद के ख्यालों के साथ समय बिताऊंगी पर गाड़ी इतनी खचाखच भरी थी कि सांस लेना भी मुश्किल था , फिर भी मैं जैसे तैसे अपनी सीट पर सेट हुई l
अचानक तेजी से आवाज आई, अफरा-तफरी मच गयी, सब चिल्ला रहे थे, अपने अपने धर्म के अनुसार भगवान को याद कर रहे थे, कुछ रो रहे थे तो कुछ ऐसे समय में भी वीडियो बना रहे थे l
उन कुछ लम्हो में मेरा पूरा जीवन मेरी आँखों के सामने चलचित्र की तरह चलते लगा l सोचने लगी कि मुझे कुछ हो गया तो मेरे परिवार वालों का क्या होगा, मेरे बच्चों का क्या होगा l मेरे दोस्त, सगे संबंधी, जान पहचान वाले, मेरा जाना सभी के लिए कितना दुखद होगा l
किसी को मेरे बारे में कब और कैसे तथा कितनी देर बाद पता चलेगा, किसी को अलविदा कहने का समय नहीं मिला, l सब रोयेंगे, आंसू बनाएंगे, दया सहानुभूति दिखाएंगे l
पर कुछ थोड़ी ही देर तो कुछ दिनों में सब नॉर्मल हो जाएंगे l परिवार जन थोड़ा ज्यादा समय लेंगे पर जल्द ही भूल जाएंगे l मेरे बच्चों का जीवन थोड़ा ज्यादा प्रभावित होगा पर धीरे-धीरे वो भी भूल जाएंगे l
ताज्जुब की बात है कि उस समय मैने अपने लेखन, अपनी पढ़ाई, अपनी उपलब्धियों अपने सोशल मीडिया के बारे में नहीं सोचा l मैने सिर्फ लोगोँ को याद किया जिनसे मैं प्यार करती हूं, जो मेरे लिए काफी मायने रखते हैं l
मैने क्या क्या बुरा किया है ये भी याद आने लगा, अच्छा तो जैसे कुछ किया ही नहीं ये महसूस होने लगा l
तभी मैने देखा कि सब ठीक है, सब ठीक हो चुका है, चिंता की कोई बात नहीं और मैं आराम से अपने घर भी पहुंच गयी l
इस यात्रा ने मुझे बदल कर रख दिया l जीवन के हर पहलू को देखने के तरीके को बदल दिया l
अब मैं समझ गयी हूं कि ये जीवन एक उपहार है, हमें ज्यादा से ज्यादा नाम जप करके अपने आने वाले समय को सुरक्षित करना चाहिए, क्यूंकि चाहे किसी से कितना भी प्रेम हो, चाहे जितनी भी धन सम्पत्ति हो, चाहे जितना नाम शोहरत कमा लो, साथ सिर्फ भक्ति के संस्कार ही जाएंगे l
राधे राधे 🙏🏻
अनुभव
नेहा वार्ष्णेय “धारा”
दुर्ग (छत्तीसगढ़)