ग़ज़ल ©डॉ कविता”किरण”
दिन का आग़ाज़ कीजिये साहिब!
आइये…..! चाय पीजिये साहिब !
और कोई किसी को क्या देगा
इक तबस्सुम ही दीजिये साहिब!
हर तरफ़ क़ुदरती नज़ारे हैं
बंद आँखें न कीजिये साहिब!
ताज़गी है खुली हवाओं में
सांस जी भरके लीजिये साहिब!
फूल बिखरे पडे हैं गुलशन में
ख़ुद को गुलदान कीजिये साहिब!
ज़िन्दगी तो ख़ुदा की नेमत है
कीजिये ग़ौर कीजिये साहिब!
©डॉ कविता”किरण”