46 चोरी के मोबाइल फोन बरामद

लखनऊ,   भीड़भाड़ वाले बाजारों, सब्जी मंडियों और मेलों से मोबाइल फोन चोरी कर साइबर ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल और थाना गाजीपुर की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में चार शातिर ठग गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि तीन नाबालिगों को संरक्षण में लिया गया है। गिरोह के कब्जे से चोरी के 46 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम कुमार महतो, सोनू महतो, राजकुमार राय और जोनू कुमार के रूप में हुई है, जो झारखंड और बिहार के रहने वाले हैं। इनके साथ पकड़े गए तीन नाबालिग भी झारखंड और पश्चिम बंगाल के गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जिन्हें चोरी के लिए लालच देकर साथ लाया गया था।गिरफ्तारी की यह कार्यवाही पुलिस आयुक्त लखनऊ के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी विशेष अभियान के तहत की गई। साइबर सेल को शिकायत मिली थी कि 8 अप्रैल को गाजीपुर क्षेत्र की मुलायमनगर सब्जी मंडी से एक व्यक्ति का मोबाइल चोरी हुआ और कुछ ही समय बाद उसके बैंक खाते से 1.99 लाख रुपये की अनाधिकृत निकासी कर ली गई। मामले की छानबीन के दौरान कई अन्य शिकायतें भी सामने आईं, जिनमें भीड़भाड़ वाले स्थानों से मोबाइल चोरी कर सिम कार्ड के जरिए बैंक खातों से ठगी की पुष्टि हुई।तकनीकी विश्लेषण, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और जमीनी खोजबीन के जरिए पुलिस टीम ने गिरोह के चार सदस्यों को दबोच लिया और उनके पास से बड़ी मात्रा में चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए। पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वे देशभर के बड़े शहरों में सक्रिय रहते हैं और छोटे बच्चों के माध्यम से फोन चोरी करवाते हैं। चोरी के बाद वे मोबाइल को फ्लाइट मोड में डालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाते हैं, फिर उसमें पड़े पासवर्ड या पैटर्न लॉक तोड़ने का प्रयास करते हैं। पासवर्ड खुलते ही सिम निकालकर फर्जी खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।गिरफ्तार आरोपियों में से सोनू महतो पर पहले से भी कई राज्यों में मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें गोरखपुर और लखनऊ शामिल हैं। पुलिस अन्य राज्यों की एजेंसियों से संपर्क कर आगे की कार्रवाई कर रही है।यह मामला न केवल संगठित साइबर अपराध की भयावहता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के नाबालिगों को इस अपराध में मोहरा बनाया जा रहा है। पुलिस ने इस गिरोह की कार्यप्रणाली, नेटवर्क और इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।