पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रयागराज में महाकुंभ की विरासत को संजोने की पहल

लखनऊ। संगम नगरी प्रयागराज, जो विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन महाकुंभ का आतिथ्य करती है, अब सालभर पर्यटकों को आकर्षित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। कुंभ मेले के दौरान शुरू किए गए अत्याधुनिक वाटर लेजर शो और विभिन्न धार्मिक स्थलों पर स्थापित फसाड लाइटिंग को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव मिल सके।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में तीव्र विकास कर रहा है और घरेलू पर्यटन में यह देश का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत प्रयागराज के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को और अधिक आकर्षक बनाया जा रहा है।महाकुंभ के दौरान यमुना नदी के तट पर स्थित काली घाट पर वाटर लेजर शो का आयोजन किया गया था, जिसमें पानी की स्क्रीन पर उभरती छवियों के माध्यम से प्रयागराज की ऐतिहासिक और धार्मिक गाथाओं को जीवंत किया गया। इस शो ने श्रद्धालुओं को महाकुंभ के गौरवशाली अतीत से जोड़ने का अवसर दिया। बड़ी संख्या में पर्यटकों की रुचि को देखते हुए अब इसे हर शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा।इसके साथ ही प्रयागराज के प्रसिद्ध अलोपी मंदिर, नागवासुकी मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर स्थापित फसाड लाइटिंग को भी अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इन स्थलों को दिव्य और भव्य रूप देने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे यह स्थान रात्रि में भी पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।पर्यटन मंत्री ने कहा कि प्रयागराज सिर्फ कुंभ और महाकुंभ तक ही सीमित न रहे, बल्कि सालभर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बना रहे, इस दिशा में पर्यटन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए प्रयागराज को एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।