मां सरस्वती की वंदना कर कार्यक्रम का किया गया शुभारंभ

बहराइच। 8जनवरी।अवध वाटिका साहित्य संस्थान (पंजी0)बहराइच के तत्वावधान में आयोजित नियमित पाक्षिक कवि गोष्ठी का आयोजन सेनानी भवन सभागार में किया गया जिसकी अध्यक्षता आदरणीय रमेश चन्द्र मिश्र ने की संचालन तिलक राम अजनबी ने किया व स्वयं के द्वारा माँ वीणा पाणि की वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ फिर नवोदित रचनाकार ओमप्रकाश यादव ने पढ़ा –इस बदन में हमेशा जवानी नहीं, इतनी जल्दी न चेहरे विशारा करो। जिसकी दुनिया में हो तुम अकेले बसे, उस मकाँ की न रौनक उजाड़ा करो।राजेश आत्मज्ञानी ने पढ़ा –तेरे चेहरे में मुझे चांद नजर आता है। चाँद में दाग है बेदाग नजर आता है। सुनील कुमार ने पढ़ा –नये साल का नया सवेरा खुशियों से भर जाये। गम की काली रात कभी फिर लौट न वापस आये। किशोरी लाल चौधरी अनाम ने पढ़ा —नीक नीक बोलव जौन हमहूं कछु समझि पाई, गिट्ट पिट्ट बोलव न भौहें मटकाओ न। दूध घिव मलाई खाव देहीं मा जौन लागै, कागज के बाती से कलेजे का जलाओ न।। शायर रईस सिद्दीकी ने पढ़ा —वक्त के साथ जो चलने का हुनर रखते हैं। बस वही लोग जमाने में असर रखते हैं।। तिलक राम अजनबी ने आधुनिक नववर्ष पर अवधी छंद पढ़ा–बीते हुए साल का मलाल कोई कीजिये न, दीजिए न ध्यान हानि हुआ किस किस को। आने वाला साल बन जाएगा मिसाल गर, लैके जाव कोई मिस आज भैया डिस्को। हास्य कवि पी0के0प्रचण्ड ने पढ़ा –शिकारी बदला है न जाल बदला है। हालात वही हैं सिर्फ साल बदला है।। अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आदरणीय रमेश चन्द्र मिश्र ने अपनी रचना के माध्यम से नववर्ष की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में दिनेश सिंह, व विनोद प्रजापतिः, राजकिशोर वर्मा, संजय वर्मा एडवोकेट, दीपेन्द़ पाण्डेय ऐडवोकेट व अन्य तमाम साहित्य प्रेमी बंधु उपस्थित रहे।