महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का महोत्सव 11 जनवरी को मनाया जाएगा। प्रतिष्ठा द्वादशी के शुभ मुहूर्त में पूजन होगा। 22 जनवरी, 2024 में इसी मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। समिति के पदाधिकारियों ने तय किया है कि 1 साल पूरा होने पर 3 दिन उत्सव हो सकते हैं। इस अवधि को बढ़ाकर 5 दिन भी किया जा सकता है।ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया- हम तैयारी कर रहे हैं कि जल्द ही सभी 18 मंदिरों की आरती लाइव दिखाई जा सके। इसके लिए दूरदर्शन से बातचीत चल रही है। सोमवार शाम को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पदाधिकारियों और न्यासियों की बैठक हुई। मणिराम दास जी छावनी में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज की मौजूदगी में कुछ अहम फैसले लिए गए।चंपत राय ने कहा- 940 Kg चांदी मिली… 90% तक शुद्ध उन्होंने कहा- राम भक्तों ने ट्रस्ट को 940Kg चांदी सौंपी है। इसे वित्त मंत्रालय के अंडर काम करने वाले सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को सौंपा गया है। हैदराबाद में इस चांदी को गलाया गया है। अभी तो परीक्षण हुए हैं, जिससे पता चला कि यह चांदी बहुत उत्तम क्वालिटी की है। चांदी के रेंडम 71 सैंपल लिए गए, इनमें से 64 की शुद्धता 90 से 98% के बीच मिली।18 मंदिरों के अर्चक तय, बारी-बारी करेंगे सेवा चंपत राय ने कहा- रामलला के पुजारी के लिए ट्रेनिंग पूरी हो गई है। अर्चकों को गाइडलाइन दे दी गई है। जो अर्चक स्वीकार करेंगे, उन्हें पूजा की जिम्मेदारी मिलने लगेगी। वैदिकों को सूचना दी गई है कि वह ट्रस्ट की गाइडलाइन का पालन कर अपना काम कर सकते हैं, मगर उन्हें सभी 18 मंदिरों में बारी-बारी से सेवा करनी होगी।अगर किसी पुजारी के घर मृत्यु हुई है, किसी बालक का जन्म हुआ है। तो इन अवस्थाओं में पुजारी को मंदिर में नहीं आना चाहिए। ऐसी स्थितियों की जानकारी हमें नहीं हो सकती है। इसलिए मंदिर की पवित्रता का ध्यान पुजारियों को ही रखना होगा।नई कैनोपी L&T और CPWD मिलकर बनाएंगे।उन्होंने बताया कि राम जन्मभूमि पर नई कैनोपी बनाई जाएगी। इसे L&T और CPWD मिलकर बनाएंगे। यह कैनोपी 100 मीटर लंबी और 9 मीटर चौड़ी होगी। चंपत राय ने बताया कि यूसुफ आरा मशीन के पास 70 एकड़ के अंदर 500 लोगों के लिए प्रेक्षा गृह विश्राम गिरी बनेगा।अगस्त में हुई थी ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय, निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती महाराज, जगद्गुरु मध्वाचार्य विश्वप्रसन्न तीर्थ डॉ. अनिल मिश्र, राजा अयोध्या विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, केंद्र, राज्य सरकार के प्रतिनिधि व जिला अधिकारी अयोध्या चंद्र विजय सिंह शामिल हुए। इससे पहले यह बैठक अगस्त महीने में हुई थी।