नई ग़ज़ल – प्रतिभा गुप्ता

बिछाकर फूल राहों में सदा कुचला नहीं जाता।

ज़रा कमज़ोर हो तुमसे उसे मसला नहीं जाता।।

जुबां देकर किसी भी हाल में तुम क्यों मुकरते हो।

ज़रा मशहूर होने पर कभी बदला नहीं जाता।।

हुआ है जन्म जिस मज़हब में उससे प्यार लाज़िम है

कभी इस दायरे को तोड़कर निकला नहीं जाता।।

जिसे सूरज पकड़ना है उसे जा करके कह देना।

चराग़ों का उजाला देखकर उछला नहीं जाता।।

भले गाढी मुहब्बत हो भले हो दुश्मनी लेकिन।

कभी बेवक़्त उसकी कब्र पर टहला नहीं जाता।।

सहारे पर चला है जो किसी के उम्र भर प्रतिभा।

फिसल जाये जो उसका पाँव तो सँभला नहीं जाता।

© प्रतिभा गुप्ता प्रबोधिनी’

खजनी, गोरखपुर