हिन्दी दिवस पर यह गीत – अंजना सिन्हा

हिंदी भाषा आज खिल रही, विश्व मंच के उपवन में।

हिंदी के प्रति प्रेम जग रहा अद्भुत सखी मेरे मन में।।

 

हिंदी जैसी रसमय भाषा, और न कोई सृष्टि में।

अलंकार रस छंद समाहित, हिंदी प्रिय सब दृष्टि में।।

हिंदी सुंदर तब लगती है, जब देखूं अपनेपन में

हिंदी भाषा आज खिल रही, विश्व मंच के उपवन में।।

 

 

देवनागरी लिपि की बेटी, अपनी हिंदी भाषा है।

वेद शास्त्रों की व्याख्या में, हिंदी की परिभाषा है।।

मातृभूमि की ममता पूरन, प्रिय देखी जीवन जन में

हिंदी भाषा आज खिल रही, विश्व मंच के उपवन में।।

 

मन में सुंदर भाव जगाती , शब्द कर्ण प्रिय हिंदी के।

कितने ग्रंथ महान हुए हैं, हिंदी में सच तुलसी के।।

भक्ति भाव से सिंचित हिंदी, भावुकता के दर्पण में

हिंदी भाषा आज खिल रही, विश्व मंच के उपवन में।।

 

अंजना सिन्हा “सखी ”

रायगढ़