तुम मुहब्बत का शजर हो मेरे मखदूम अशरफ, उर्स ए मुबारक किछौछा शरीफ

अनुराग लक्ष्य, 4 अगस्त
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता।
उत्तर प्रदेश के किछौछा में सैय्यद मखदूम अशरफ सिमनानी की 638 वें उर्स के मौके पर धारावी के मदीना मस्जिद में एक जलस ए ईद मीलादून नबी का एहतमाम किया गया, जिसकी सदारत हज़रत ए अल्लामा मौलाना इशराक साहब ने की, और नेजामत के फरायेज़ को बखूबी अंजाम दिया शायर सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने।
,, ऐ खुदा आज की शब लाल ओ गुहर हो जाए
ख्वाहिश ए दिल है के तैबा का सफर हो जाए
है तमन्ना यही ज़िंदा हैं जो तरीकी में
ऐसे इंसानों की दुनिया में सहर हो जाए,,,
उपरोक्त पंक्तियों के साथ जलसे के नाजिम सलीम बस्तवी अज़ीजी ने जलसे का आगाज़ किया, जिसे उपस्थित समायीन हजरात ने बेहद सराहा।
जलसे का आगाज़ तिलावत ए कुरआन से हुआ, तदुप्रांत हाफिज इकराम ने अपना नातिया कलाम,,,, वाह क्या जूदो करम है शह ए बतहा तेरा ,,, सुनाकर समायींन के दिलों में उतर गए।
इसके बाद हाफिज ओ कारी मुहम्मद शाह नवाज़ रिज़्वी ने अपना कलाम,,, खुदा का हो गया जो हो गया मख़दूम अशरफ का, खुदा से इस कदर है वास्ता मख़दूम अशरफ का,, सुनाकर खूब दाद ओ तहसीन हासिल किया।
इसी फेहरिस्त में मस्जिद के बानी जुनैद आलम अशर्फी ने अपना कलाम,,, मर्तबा कितना है जीशान किछौछे वाले, आप सिमनां के हैं सुलतान किछौच्छे वाले,, सुनाकर हजरत मखदूम अशरफ सिमनानी के खेरआज ए अकीदत पेश की।
नेज़ामत कर रहे शायर सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने कई कतात के साथ अपना कलाम,,,
तुम मुहब्बत का शजर हो मेरे मखदूम अशरफ
तुम मेरी शाम ओ सहर हो मेरे मखदूम अशरफ
तुमसे रोशन है जहां आज मेरा दुनिया में
तुम मेरे शम्स ओ क़मर हो मेरे मखदूम अशरफ,,,, सुनाकर महफिल को झूमने पर मजबूर कर दिया।
और, आखिर में, हज़रत ए अल्लामा मौलाना इशराक साहब किबला ने अपनी तकरीर में शहंशाह ए किछौछा की रूहानी शख्सियत पर रोशनी डाली, और उनकी वेलाएत के करामात के फैजान की बात करते हुए किछौछा के तारीखी और ऐतिहासिक पहलुओं से भी समायींन हज़रात को ज़हन नशीन किया।
जलसे का समापन दुरूद ओ सलाम के साथ हुआ।