रक्त दान है महादान,
नहिं इससे ऊंचा दान।
मानवीय मूल्यों का है ये,
सर्वश्रेष्ठ सम्मान।।
सर्वश्रेष्ठ सम्मान,
किसी को जीवन देना।
किस पल किसको बना ले,
अपना काल चबेना।।
घटना घट सकती हर इक पर,
न जाने किस वक्त।
प्रतिपल तत्पर रहना “राही”
देने को निज-रक्त।।
राणा प्रताप सिंह “राही”
गोण्डा।
सचल:-९२६०९०१८५२
*परदुख द्रवहिं सन्त सुपुनीता*
*रक्तदान-महादान*