विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर रक्तदान करते हुए – राणा प्रताप सिंह राही

सोचो! होता यदि अपना,

तो क्या न करते।

मानवीय जिम्मेदारी से,

क्यों हो मुकरते?

क्यों हो मुकरते?

बूंद कछुक शोणित देने में।

हो गौरवान्वित,

व्यथा किसी की हर लेने में।

ऐसी स्थिति में परिजन,

की खाल न नोचो।

उनकी जगह पर आप

स्वयं हो,खुद में सोचो।।

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