तिरंगे में लिपटा जवान का शव देख फफक पड़े लोग

कुदरहा, बस्ती। बदहवास मां की आंखें नम थीं, 85 वर्षीय पिता की पथराई आंखे बेटे के पार्थिव शरीर को देखे जा रही थीं, बेसुध पत्नी दहाड़े मारकर दौड़ी और पति के पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट पड़ी। मासूम बेटे देवांश और प्रतीक पूछ रहे थे कि पापा को क्या हो गया? यह दृश्य ऐसा था जिसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया और सभी की आंखें नम हो गई।
दरअसल बस्ती जिले के नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ऐलिया गांव में छुट्टी पर घर आये आर्मी जवान 38 वर्षीय यशवंत ओझा करेंट के चपेट में आने से घायल हो गये। स्वजन जिला अस्पताल लेकर गए जहां यशवंत ओझा को मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार की सुबह जब जवान का शव गांव पहुंचा तो तिरंगे में लिपटे शव को देख हर किसी की आंखे भर आईं। पत्नी बेसुध हो गई और बच्चों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे।
वहीं 85 वर्षीय बूढ़ा बाप एक कोने में बैठा पथराई आंखों से बेटे के पार्थिव शरीर को निहार रहा था और शायद यह सोच रहा था कि जिन कंधों पर खुद की अर्थी उठती उसी जवान बेटे की अर्थी को आज कंधा देना पड़ रहा। एक बाप का इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है। जो अपने जीते अपने जवान बेटे को कंधा दे। बूढ़ी मां की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। जवान बेटे के शव से लिपट कर रो रही मां ने कैसे-कैसे सपने देखे थे कि उसका लाल उन सपनों को पूरा करेगा, लेकिन उसको यह नहीं मालूम था कि उसका लाल उसके लिए खुद एक सपना बनकर रह जाएगा। मां की पथराई आंखों में शायद अब आंसू भी सूख चुके थे।
राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से जवान को दी अंतिम विदाई
जवान यशवंत ओझा के गांव ऐलिया पहुंचे गोरखा रेजिमेंट कूड़ाघाट गोरखपुर से सूबेदार मेजर धनीराम अधिकारी के नेतृत्व में सेना के जवानों की टीम नें राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी देते हुए नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई तो हर कोई फफक पड़ा। इस दौरान सेना के जवान नवीन सिंह, अनिल घले, प्रीतम सिंह, नीमा लिम्बु के साथ ही मृदुल कुमार, सूबेदार आरके मिश्र, फौजी पंकज सिंह आदि मौजूद रहे।
मासूम बेटे ने मुखाग्नि से पहले दी सलामी तो भावुक हुए लोग
कलवारी थाना क्षेत्र के सरयू नदी माझा खुर्द घाट पर जवान यशवंत ओझा को अंतिम सलामी के बाद मुखाग्नि दी गई। मुखाग्नि के पहले मासूम बेटे व बेबस बूढ़े पिता ने जवान यशवंत को जब अंतिम सलामी दी तो सभी का गला रुंध सा गया, सभी आंखों में आंसू थे और हर कोई विधाता को कोस रहा था कि ईश्वर इस परिवार के साथ तूने ऐसा क्यूं किया। बूढ़े मां बाप अब किसके सहारे जिएंगे, मासूम बच्चों का क्या होगा और उस बेबस पत्नी का क्या होगा जिसके हर तरफ अब अंधेरा ही अंधेरा हो गया है। यह सब सोच हर कोई भावुक नजर आया।
स्वजन को सांत्वना देने पहुंचे लोग
भारतीय सेना में जवान रहे यशवंत ओझा के शोकाकुल स्वजन को सांत्वना देने क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अंतिम यात्रा में लोगों ने पुष्प की वर्षा किया। इस दौरान पूर्व फौजी व प्राथमिक शिक्षक संघ जिला महामंत्री बालकृष्ण ओझा, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि शैलेन्द्र दूबे, समाजसेवी राजन पाण्डेय, संजीव पाण्डेय, प्रधान राजदेव, करुणेश मिश्र, अजय ओझा, विजय श्याम पाण्डेय, के साथ ही सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *