*ओ३म्*
🌴आज का दिनांक 🌴
म ई 14मई सन् २०२४
🌻वेद मंत्र का परिचय 🌻
ऋग्वेद मंडल -१ सूक्त -१ मंत्र संख्या -९
📚आज का वेद मंत्र 📚
*ओ३म् स न: पितेव सूनवेऽग्ने सूपायनो भव।सचस्वा न: स्वस्तये।।*
🌿 मंत्र का पदार्थ 🌿
हे *स:*= मनुष्यों!वह *अग्ने*= ज्ञानवान परमात्मा। *पितेव*= जैसे पिता *सूनवे*= अपने पुत्र के लिए उत्तम ज्ञान देने वाला होता है, वैसे ही आप। *न:*= हम लोगों के लिए *सूपायन*= वह वेदज्ञान जिससे लोक -परलोक दोनों बनता है, उसके देने वाले होकर *न:*= हम लोगों को *स्वस्तये*= सब सुखों के लिए *सचस्व*= प्राप्त कराइये।।
🌹 *मंत्र का भावार्थ*🌹
इस मंत्र में उपमालंकार है। ईश्वर को समझाने के लिए हीन उपमा का प्रयोग है।हीन उपमा इसलिए कहा क्योंकि परमात्मा से जीव व प्रकृति दोनों की उपमा संभव नहीं मगर समझाने के लिए उपमा होना जरूरी है इसलिए हीन उपमा का प्रयोग किया गया है।
इस में ईश्वर को समझाने के लिए पिता की हीन उपमा दी है कि हे ईश्वर जैंसे पिता अपने पुत्रों को अच्छी प्रकार पालन करके और उत्तम शिक्षा देकर उनको शुभ गुण और श्रेष्ठ कर्म करने योग्य बना सकते हैं वैसे ही आप हम लोगों को शुभ गुणों और शुभ कर्मों से युक्त सदैव कीजिए।।
🌲 *मंत्र का सार*🌲
इस मंत्र में बताया गया है कि हम चाहें तो ईश्वर से अपने पांच प्रकार के संबंध बनाकर प्रार्थना कर सकते हैं।वो संबंध इस प्रकार हैं।
[१] हे ईश्वर! आप हमारी माता हैं।
[२] हे ईश्वर! आप हमारे पिता हैं।
[३] हे ईश्वर! आप हमारे आचार्य हैं।
[४] हे ईश्वर! आप हमारे उपासक हैं।
[५] हे ईश्वर! आपका हमारा व्याप्य -व्यापक संबंध है।
ध्यान रहे यहां एक *भ्रांति* हो सकती है कि जब ईश्वर माता-पिता आचार्य है तो फिर वह साकार होगा! इसका उत्तर है यहां माता -पिता-आचार्य के शरीर की बात नहीं हो रही है। जैंसे माता के पास *जन्म* पिता के पास *पालन* और *आचार्य* के पास ज्ञान का गुण है उसी प्रकार *परमात्मा* के पास ये सभी गुण एक साथ सिद्ध होते हैं। अतः संबंध शरीर के नहीं हो सकते । क्योंकि परमात्मा *निराकार* है यही उसका स्वभाव है कि वो कभी भी *साकार* नहीं होता है। इसलिए ये संबंध भी गुणवाची हैं।जो लोग ध्यान नहीं लगा सकते वो इन गुणों द्वारा ईश्वर की *स्तुति-प्रार्थना-उपासना* कर सकते हैं।यह आशय है।।
🍁 *विशेष सूचना*🍁
आज ऋग्वेद मंडल एक सूक्त एक ईश्वर की कृपा व आपकी लग्न से पूर्ण हो गया।कल से ऋग्वेद मंडल एक और सूक्त -२ में ईश्वर की कृपा से प्रवेश करेंगे!
*आचार्य सुरेश जोशी*
🏵️ वैदिक प्रवक्ता 🏵️
7985414636