उपनयन संध्या करने से शुभ कर्म नष्ट नहीं होते हैः अनिल द्विवेदी

अयोध्या अप्रैल।अखिल विद्वद्- धर्म विचार समिति के तत्वाधान में  सपरशुराम शिव पंचायतन मंदिर दुर्वासा आश्रम के पवित्र परिसर में मंदिर अधिष्ठाता श्रवण कुमार मिश्र के आचार्यत्व में विप्र बटुकों का उपनयनादि संस्कार परम विद्वानों की उपस्थिति में सविधि संपन्न हुआ। विधि एवं शिष्ट परंपरानुसार उपनयन के पूर्व बटुकों को दधि  चिउड़ा (चूरा) शर्करा के साथ खिलाया गया। ब्रह्म गायत्री मंत्र दीक्षा के पश्चात् भिक्षाटन कर्म अत्यंत दर्शनीय एवं अद्भुत था। वेदारम्भ के अनन्तर अन्य शेष कम संपन्न कराये गये । बटुकों को उपदिष्ट करते हुए आचार्य श्रवण कुमार मिश्र ने बताया कि “क्रमशः उपनयन संध्या उपासनादि कर्म एवं वेदाध्ययन तत्पश्चात् यज्ञ करने और करने का अधिकार प्राप्त होता है  सत्संस्कार सदैव हमें सदा चरण की ओर प्रेरित करते हैं संस्कारहीनता का ही दुष्परिणाम है जो मदिरा पान अनर्थ का साधन है उसे अर्थ का साधन माना जाता है इतना ही नहीं इस रामराज के दौर में भी जो समलैंगिकता जैसे बाहरी असभ्यता एवं  कदाचरण तक पहुंच गए हैं वह सब संस्कार हीनता का ही परिणाम है।डॉ कृष्ण कुमार पांडे जी ने कहा है कि संस्कार सद्गुणों का आधान करते हैं जिस व्यक्ति व्यवस्थित होता है इसी क्रम में शिवानंद मिश्र ने बताया कि संस्कारवान् व्यक्ति ही श्री राम जी के मर्यादित पथ पर चल सकता है डॉ मनमोहन सरकार ने स्वरचित कविता के माध्यम से संस्कारों पर प्रकाश डाला अनिल द्विवेदी ने बताया कि संध्या न करने का प्रत्यवाय किसी भी शुभ कर्म से नष्ट नहीं होता अतः संध्या अनिवार्य है।इस कार्यक्रम में जन्म भूमि के पुजारी संतोष तिवारी हैदराबाद से केशव शर्मा शर्मा धीरज शर्मा, पुणे से पवन शास्त्री वागीश पाण्डेय, दुर्गेश दास मानस तिवारी रामानुज तिवारी सोमदेव वैदिक राहुल तिवारी नमो नारायण अजय पांडे रोहित आदि विद्वज्जन उपस्थित रहे।

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