नई गजल

“पन्ना पलट के देखते हैं”

चलो फिर आज पीछे मुड़ के देखते हैं।

तुमसे इक बार फिर बिछड़ के देखते हैं॥१

 

जहां लहरा के ज़ुल्फ़ों ने किये थे इशारे।

वहीं इक बार चलो फिर टहल के देखते हैं॥२

 

तुम्हारे साथ ग़मों की कभी ली थी चुस्की।

चलो इक बार ग़मों को फिर पी के देखते हैं॥३

 

तुम्हारे आने से पहले वीरान – ए- चमन था।

तुम्हारे बाद उसका हस्र फिर से देखते हैं॥४

 

तुम साथ नहीं थे तो जीना तो कठिन था।

ताहम तुम्हारे बिन चलो फिर जी के देखते हैं॥५

 

मेरा एकाकीपन भले गुजरेगा दर – ब- दर।

ताहम तुम्हारा पन फिर से चलके देखते हैं॥६

 

अकेले न हुआ कभी मुझको हंसी नसीब।

ताहम इक बार चलो फिर हंस के देखते हैं॥७

 

लिखीं तमाम ख़्वाहिशें किताबे दिल में मैंने।

चलो इक बार फिर पन्ना पलट के देखते हैं॥८

 

बाल कृष्ण मिश्र कृष्ण

२४.०३.२०२३

बूंदी राजस्थान

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