बलिदान दिवस पर याद किये गये शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव

बस्ती। शहीदे आजम भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान दिवस पर उन्हें याद किया गया। शनिवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव का. अशर्फीलाल के संयोजन में रोड तिराहा स्थित भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अमर शहीदों को नमन् किया गया। इसके बाद मालवीय रोड स्थित बिजली कर्मचारी संघ के कार्यालय पर संगोष्ठी कर भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के योगदान पर विमर्श किया गया।
का. अशर्फीलाल ने कहा कि व्यक्ति को मारा जा सकता है उसके विचार को नहीं। बड़े साम्राज्यों का पतन हो जाता है लेकिन विचार हमेशा जीवित रहते हैं और बहरे हो चुके लोगों को सुनाने के लिए ऊंची आवाज जरूरी है। बम फेंकने के बाद भगतसिंह द्वारा फेंके गए पर्चों में यह लिखा था। अमर बलिदानियों के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
संगोष्ठी में सीटू नेता का. के.के. तिवारी ने 23 मार्च यानि, देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों को हंसते-हंसते न्यौछावर करने वाले तीन वीर सपूतों का शहीद दिवस। यह दिवस न केवल देश के प्रति सम्मान और हिंदुस्तानी होने वा गौरव का अनुभव कराता है, बल्कि वीर सपूतों के बलिदान को भीगे मन से श्रृद्धांजलि देता है। हमें उनके योगदान को याद रखना होगा।
जिला टेªड यूनियन के महामंत्री का. के.के. श्रीवास्तव ने अध्यक्षता करते हुये कहा कि पुलिस की बर्बर पिटाई से लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए राजगुरु ने 19 दिसंबर, 1928 को भगत सिंह के साथ मिलकर लाहौर में अंग्रेज सहायक पुलिस अधीक्षक जेपी सांडर्स को गोली मार दी थी और खुद ही गिरफ्तार हो गए थे। भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव ने देश को आजादी दिलाने के लिये अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।
शहीदे आजम भगतसिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण और संगोष्ठी में मुख्य रूप से का. रामलौट, शेषमणि, रामरूप, समीर, शिवचरन निषाद, गंगाराम सोनकर, नरेन्द्र प्रताप, कृष्ण मुरारी यादव, कु. प्रीती, नीतू, रोशन अली, अशोक कुमार, डा. राम जियावन, भोला आदि उपस्थित रहे।

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