,,,,अंखियों के झरोकों से आगामी चुनाव 2024,,,,,,,,, एक तरफ भाजपा का साम्राज्य और दूसरी तरफ देश की समस्त पार्टियां,,,,,

,
अनुराग लक्ष्य 23 जनवरी
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता।
राजा, प्रजा और शासन । कोई कहता है कि यह भारतीय जनता पार्टी का स्वर्णिमकाल है, कोई कहता है कि विकास की आंधी का दौर है, और कोई यह कहता है कि हम भूके हैं, प्यासे हैं और बेरोजगार हैं। यह तो वही बात हो गई कि जैसे जाड़ा गर्मी और बरसात। जाड़े में लोग ठंडक की वजह से परेशान, गर्मी में गर्मी की वजह से परेशान और बरसात की बात ही क्या करना, यह तो सभी जानते हैं कि बरसात में क्या होता है।
अब इस धरती पर रहने वाले जब आसमान की तरफ देखते हैं तो उन्हें पूरा नीला आसमान भगवा रंग का ही दिखाई देता है तो इसमें कुछ तो सच्चाई होगी । आखिर नीला आसमान आज पूरा का पूरा भगवा रंग में डूबा केयों नज़र आ
रहा है। अब अगर नज़र आ रहा है तो इस सच्चाई को नकारा भी नहीं जा सकता। जो सत्य है वोह है।
आखिर वोह कौन से कारण हैं जो पिछले कई चुनावों से देश की समस्त राजनैतिक पार्टियां इस नीले आसमान को भगवा रंग में देखते हुए भी क्यो नहीं इसका रंग बदल पा रहे हैं। मैं बताता हूं, बुजुर्गों ने हमेशा अपनी युआ पीढ़ी को एक सबक हमेशा पढ़ाया, रटाया, कि बातों की तलवार से गर्दन नहीं कटती, तुम सिर्फ बातों से किसी के दिल पर, किसी देश पर, या समय पर विजय प्राप्त नहीं कर सकते हो। उसके लिए खून जलाना पड़ता है, समय के साथ चलना पड़ता है और अपने अंदर सच्चाई और ईमानदारी का बीज बो कर समाज सेवा, देश सेवा की कश्ती में सवार होना पड़ता है। तब जाकर किसी भी देश की तस्वीर बदलती है।
मैं यहां देश की किसी भी पार्टी का नाम लिए बगैर यह बात कहना चाहता हूं कि आज सारी लड़ाई, सारी प्रतिस्पर्धा माननीय मोदी जी से ही क्यों, अपने आप से क्यों नहीं, अपनी नीतियों से क्यों नहीं। आखिर क्यों आज देश की जनता सिर्फ भाजपा को अपना सिर मौर्य बनाए हुए है। वजह बिलकुल साफ है, भाजपा के इलावा जितनी भी देश की राजनैतिक पार्टियां हैं। अपने अतीत में की गई गलतियों का अवलोकन करलें, साथ ही ईमानदारी के साथ जनता के दुख सुख और उनके हक ओ हुकूक को अपनालें तो आसमान का रंग बिल्कुल बदल सकते हैं। लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है। क्योंकि जो यह आसमान नीचे से भगवा रंग दिखाई दे रहा है। वोह दो चार या दस साल की तपस्स्या तो नहीं है। यह उनकी एक लंबे युगकी की गईं तपस्या का परिणाम है, जिसे सिर्फ आसमान की तरफ मुंह करके देखने से नहीं बदला जा सकता। यही सत्य है। और मुझे यह भी लगता है कि आगामी 2024 का लोकसभा चुनाव का रंग फिर एक बार आसमान पर भगवा रंग का ही दिखाई देगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *