शीर्षक – रंगों का त्योहार 

शीर्षक – रंगों का त्योहार

रंगों का त्योहार आ गया, झूम उठा जग सारा,

प्यार बरसता है रंगो में, जैसे चांद और तारा ।

खुशियों से जीवन भरती है, पर्व बड़ा है प्यारा,

पिचकारी संग राधा नाची, नाचा है जग सारा।

आनंदित कर देता है, रंग संग साथ तुम्हारा,

पीकर भंग चढ़े अंग रंग, स्वर्ग यहीं पर सारा।

जीवन में जो रंग भरे हैं, खाली न हो दुबारा,

अब के बरस होली में, हो प्यारे साथ तुम्हारा।

सौ रंगों सा जीवन हो, सौ बरस हो साथ तुम्हारा,

रंग बिरंगी पिचकारी संग, नाचा है डमरू वाला।

बालाएं थिरकीं इसमें, थिरका था वंशी वाला,

पकवानों से थाल सजाकर, खाते सभी निवाला।

लोगों में है प्यार बरसात, गले मिले जग सारा,

रंगों का त्योहार आ गया, झूम उठा जग सारा।

 

साहित्यकार एवं लेखक –

डॉ आशीष मिश्र उर्वर

कादीपुर, सुल्तानपुर, उ.प्र.

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