🥝🥝 ओ३म् 🥝🥝
🧘 स्त्री आर्य समाज बरेली 🧘
✍️ नारी गायत्री जपेगी✍️
जो तथाकथित धर्माचार्य यह कहते हैं कि नारियों को गायत्री मंत्र का जप नहीं करना चाहिए और यज्ञोपवीत नहीं पहनना चाहिए उन कथावाचकों को नारी जाति से क्षमा मांगनी चाहिए और वैदिक संस्कृति का अध्ययन करने के लिए पुनः गुरुकुल जाकर योग्य आचार्यों के पास बैठकर वैदिक धर्म ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए।
वेदों के अनुसार नारी नर से अधिक योग्य है इसका प्रमाण वेद खुद हैं। वेदों में नारी की योग्यता को देखकर उनके अनेक नामों का वर्णन किया गया है। उदाहरण के लिए कुछ नामों की परिचर्चा करते हैं।
🌹🌹कन्या 🌹🌹
** कमनीया भवति कन्या** अर्थात् जो उत्तम गुणों,शील, चरित्र व जन्म से ही गुणगान है उसे कन्या कहते हैं।
🌹🌹 दुहिता 🌹🌹
दुहिता दुर्हिता दूरेहिता भवतीति वा। अर्थात् दूरस्थ विवाह में जिसका हित है वो दुहिता है।
🌹🌹वधू 🌹🌹
वह+धूम= वधू। अर्थात् गृहस्थाश्रम के कर्तव्यों को पूर्ण करने हेतु मंडप पर लाई गई वह वधू है।
🌹🌹 पत्नी 🌹🌹
पत्युर्नो यज्ञ संयोगे! अर्थात् पति के धार्मिक अनुष्ठान में सहयोग करने वाली।बिना पत्नी के पति भी गायत्री जाप नहीं कर सकता।