असम के भोर ताल नृत्य और राजस्थान सुगना राम बापू जी की फड लोक गायन की खुशबू से महका तुलसी उद्यान

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। तुलसी उद्यान मंच पर चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्तर्गत संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, संस्कृत विभाग उत्तर प्रदेश,उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित रामोत्तसव कार्यक्रम के अंतर्गत दिन बुधवार को पहली प्रस्तुति सुगना राम राजस्थान बापू जी की फड लोक गायन राजस्थान के लोक देवता है जिसे लक्ष्मण का अवतार भी कहते हैं इस गायन को गौ रक्षक के रूप में गाया जाता है। इसके पश्चात प्रयागराज से आए श्री अतुल कुमार त्रिपाठी लोक गायन “पायो जी मैंने राम रतन धन पायो,सीता राम सीता राम कहिए जहि विधि राखे राम रहै विधि रहिये…पार न लगोगे श्री राम के बिना..रघुपति राघव राजा राम..
सजा दो घर को गुलशन सा अवध में राम आये हैं..श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम् प्रयागराज.. इसके पश्चात झारखंड बोकारो की रंजना राय की लोक गायन बधाई गीत बधाईया बाजे अवधपुरी में…जनेऊ गीत दशरथ के चारों ललनवा मंडप पर शोभे, विवाह गीत रहवा से आवत तारे राम धनुधरिया…कहवा से सिया दुल्हनिया होली गीत गोरिया करके श्रृगार अंगना में पीसेली हरदिया…को सुनकर सभी श्रोता झुम गए और नाचने लगे। इसके पश्चात शर्मा बंधु के प्रसिद्ध भजन सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये छाया..के पुत्र इंदौर के श्री अंजुल शर्मा लोक गायन आया मैं तेरे ही द्वारे चलना सम्भालना गिर जाना… अबकी बेर जग जाल में…गीतावली के पद जब शंकर जी के भेष में रहकर राम जी के दर्शन करने के लिए थे.. तुम भी कहो सिया राम हम भी कहेंगे सियाराम… चलो अयोध्या धाम. की प्रस्तुति को सुनकर सभी भाव विभोर हो गए।इसके पश्चात असम के सुशील एवं दल द्वारा भोर ताल नृत्य की प्रस्तुति बहुत जोरदार रही इसके बाद पंजाब के धर्मेंद्र सिंह एवं दल द्वारा भांगड़ा नृत्य की की प्रस्तुति रही।

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