
अनुराग लक्ष्य, 26 फरवरी
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
यूं तो इंसान का इस दुनिया में आना और जाना यह तो कुदरत के हाथ में है, लेकिन यह बात मैं बड़े फख्र से कह सकता हूं कि उस दौर में पंकज उधास ने अपनी गायकी का जलवा बिखेरा था, जिस दौर में गजलों के लिए मशहूर रहे गुलाम अली और मेंहदी हसन को लोग जानते थे, यह फनकारी का कमाल नहीं तो और क्या था।
सबको मालूम है मैं शराबी नही, फिर भी कोई पीला दे तो मैं क्या करूं, चिट्ठी आई है आई है चिट्ठी आई है, और मोहरा का वोह नायब गीत ,तुम कितनी सुंदर हो, भुलाए से भी नहीं भूला जा सकता। आज भारतीय संगीत का एक बड़ा सितारा हमने खोया है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
पंकज उधास ने जितनी लोकप्रियता अपने एल्बम को गाकर बटोरी उससे कहीं ज्यादा उन्होंने फिल्मों में गाकर अपना योगदान दिया। हिंदी सिनेमा के लिए भी पंकज का जाना एक बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई हिंदी फिल्म इंडस्ट्री कभी नहीं कर पाएगी।
दिल गमगीन है आंखें नम हैं कि पद्मश्री पुरस्कार सम्मान से सम्मानित पंकज उधास जैसे नफीस फनकार को आज हिंदास्तान की आवाम और संगीत के ग़ज़ल प्रेमियों ने पंकज उधास को खो दिया। बहुत अफसोस के साथ यह कहना पड़ रहा है कि आज 26 फरवरी 2024 को दिन के 11 बजे ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनका निधन हो गया । वोह लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
अनुराग लक्ष्य परिवार दुख की इस घड़ी में अपनी नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है।