महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्याधाम में सरयु तट स्थीत आदरणीय गुरुदेव करतलियाबाबा अनुमानित दो अढाई सो वर्ष जगद् जननी पतित पावनि मां सरयु तट पर दुध व सरयु जल पीकर भजन तपस्या करते थे राम नाम में लीन अनेको चमत्कारिक कार्य होता था कुछ शिष्यो के साथ लकड़ी का घर मे निवास करते थे कभी कभी सरयु नदि में बाढ आ जाता आश्रम में भी पानी भर जाता बहुत संत बाबा से निवेदन करते बाबा गांव में चले आपका सब ब्यवस्था वहा कर देते हें किन्तु बाबा सरयु तट नही छोडते तख्ता चौकी पर आसन रख निरन्तर सीताराम सीताराम की धुन में मस्त रहते थे अयोध्याधाम वासी संत महान्त गृहस्थ सज्जन सब बाबाजी को बड़े श्रद्धा से संमान देते ।
पुज्य गुरुदेव नित्य हनुमान गढी कनक भवन दर्शन करने जाते एक दिन कनक भवन में कनक बिहारी सरकार के सम्मुख सीताराम नाम में लीन करताल बजा बजा कर नाच नाचकर भावविभोर थे बाबा जी पसीना से लथपथ सीताराम नाम में मग्न थे अचानक कनक बिहारी सरकार के पुजारी जी मंदिर से बाहर आकर बताऐ की भगवान श्री सीताराम जी के पोशाक भीगा हुआ है यह चमत्कार देख पुजारी जी घबरा रहे थे यह केसे हुआ उस समय हनुमान गढी के बसंतिया पट्टी गुलचमनबाग के परम भजनानन्दी संत महान्त श्री बुलबुली बाबा पहलवान एवं काशी से दर्शन करने आए त्यागी बाबा महान्त बासुदेव दास जीमहाराज आदि संत भी दर्शन करने आए थे पुज्य करतलिया बाबा को पसीने तर वस्त्र देख पुजारी जी से बताऐ देखो करतलिया बाबा को शायद ठाकुर जी का पोशाक भीगने का चमत्कार सभी संतो ने करतलिया बाबा से आग्रह किए कुछ बिश्वास किजिए ठाकुर जी पसीने से भीगे हूऐ हें तब बाबा बैठकर संकीर्तन करने लगे कुछ देर बाद ठाकुर जी कनक बिहारी सरकार का पोशाक भी सुखा हुआ दिखने लगा ऐसा अनेको चमत्कार बाबाजी के साथ होता रहता था बाबाजी अपने माथे पर भी तिलक चंदन में सीताराम लिखते प्रातः तिन बजे नित्य सरयु तट पर जोर जोर से सीताराम सीताराम गाते जिससे अयोध्या वासी संत जाग जाते और सब सन्तो ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करते भजन पुजा पाठ कर अपने अपने स्थान चले जाते किन्तु आदरणीय गुरुदेव करतलिया बाबा अपने साधना भजन धून में मग्न रहते एक समय सरयु माता बड़े रोद्र रुप में बाढ लेकर आयी चारो तरफ पानी ही पानी यह सब देखकर अवध वासी कुछ संतो गृहस्थो ने सीद्ध संत श्री करतलिया बाबा से विनय पूर्वक कहा गुरुदेव अगर आप मां सरयु से प्रार्थना करेंगे तो माता सरयु अपना यह रोद्र रुप शान्त कर लेगे यह बात सभी संतो का सुन सिद्ध संत श्री करतलिया बाबा जी माता सरयू से प्रार्थना किए मां अपना यह रोद्र रुप से सभी को क्यो दुख दे रही हो शान्त हो जाइए तत्काल ही माता सरयु शान्त हो गए और अवध वासी बाबा का जयघोष करने लगे उस समय डिसटिक मजिस्ट्रेट श्री गया प्रसाद जी थे जो यह सब देखकर बहुत प्रभावित हुए ओर उन्होने अपने मित्रो के साथ मिलकर करीब पच्चीस तीस कमरे लकड़ी का बनवाकर आश्रम में रहने वाले संतो के लिए कमरा बनवाकर पुज्य गुरुदेव आदरणीय करतलिया बाबा को अर्पण किया जहा सेकडो संत निवास भजन जप संकीर्तन करते उनके साकेतवास के वाद आदरणीय गुरुदेव श्री मोनी बाबा हुए तत्पश्चात तीसरे पीढी में पुज्य स्वामीयोगीराजजीमहाराज महंत हुए जो अपने प्रिय शिष्य बाल योगी जीमहाराज को समाजिक परंपरानुसार उस गदि पर अभिषेक किया जो वर्तमान महंत हे युवा संत है संत सेवा गो सेवा अभ्यागत सेवा में अग्रणीय है कोविट महामारी में वेजुवान प्राणी गाय अन्य पशु एवं बन्दरो को नित्य घास चारा और भीगा हूआ चना खिलाकर सभी को क्षुधा तृप्त करते एवं अभी भी असहाय का सैवा करते ठंडी में गरीबो को गर्म कपडा कम्बल एवं भोजन देते हे ।