बस्ती – महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय बस्ती में छात्र शिकायत निवारण प्रकोष्ठ के तत्वाधान में ” *”महिलाओं के संबंध में संवैधानिक सुरक्षा और कानून”* विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य सुनीता तिवारी, द्वारा मां सरस्वती की प्रतीमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से किया गया।
प्राचार्या प्रो सुनीता तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को अपने संवैधानिक अधिकारों की जानकारी होना आवश्यक है,अधिकारों की जानकारी होने से उनका कोई उत्पीड़न और शोषण नहीं होगा,
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्राचीन इतिहास विभाग की सहायक
आचार्य डॉ नूतन यादव एवं समाज शास्त्र की सहायक आचार्य डॉ सुहासिनी सिंह रहीं।
कार्यक्रम के प्रारंभिक उदबोधन में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो0 सुनीता तिवारी ने बताया कि महिलाओं को जो भी अधिकार दिए गए हैं उनके प्रति पढ़ी लिखी और नौकरी पेशा महिलाएं तो जागरूक हैं। परन्तु उन महिलाओं का क्या जो घर पर रह कर कार्य कर रहीं हैं ?तथा उन महिलाओं का क्या जो मजदूरी कर के तथा अन्य दूसरे कार्य करके अपना भरण पोषण कर रही हैं ? अतः समस्त अधिकारों का हाशिये पर रह रहे लोगों तक पहुँचना आवश्यक है तभी उसकी सार्थकता है।
प्रथम सत्र में कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ नूतन यादव रहीं। उन्होंने ने अपने व्याख्यान में बताया कि भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही पुरुषों के समतुल्य स्थान दिया गया है।
द्वितीय सत्र में कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ0 सुहासिनी सिंह रहीं। महिलाओं की मुक्ति के संदर्भ में कानून के समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य को प्रस्तुत करते हुए बताया कि कानून के निर्माण, कानून के लागू होने एवं कानून के निर्णयन में सबसे महत्वपूर्ण है महिलाओं का जागरूक होना।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ रुचि श्रीवास्तव रहीं। इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ० सीमा सिंह, डॉ0 रघुवर पाण्डेय, डॉ० स्मिता सिंह, डॉ सुधा त्रिपाठी, डॉ0 संतोष यदुवंशी , डॉ0 प्रियंका मिश्रा एवम श्रीमती नेहा श्रीवास्तव के साथ समस्त शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं महाविद्यालय की समस्त छात्राएं उपस्थित रहीं।