विश्व व्यापी राम: त्रिभुवन प्रसाद मिश्र

राम विश्व में कितने व्याप्त हैं यह इस बात से प्रतीत होता है कि ईसा से अनेक शताब्दियों पूर्व श्री वाल्मीकि ने संस्कृत भाषा में रामायण की रचना की । इसमें राम का चरित्र इतना उदात्त ,प्रेरणादायक और अभिराम है कि स्वयं महर्षि वाल्मीकि को विश्वास था कि जब तक पृथ्वी पर पहाड़ रहेंगे, नदियां रहेंगी तब तक राम कथा प्रचलित रहेगी। महाकवि का यह विश्वास समय सिद्ध भी हुआ। कालांतर में संस्कृत भाषा का वह महत्व नहीं रहा फिर भी राम कथा की लोकप्रियता क्षीण नहीं हुई वह नए परिवेश में नवीन अलंकारों से विभूषित होकर आधुनिक भारतीय भाषाओं में प्रकट हुई। इन लोक भाषाओं के माध्यम से राम कथा राजमहलों, मंदिरों और विद्वानों की पोथियों से निकलकर सामान्य जन की कुटिया तक पहुंची। महाराष्ट्र में संत एकनाथ ने भावार्थ रामायण की रचना की ईसा की 11वीं शताब्दी से 17वीं शताब्दी तक तमिलनाडु में कम्ब ऋषि द्वारा रचित कम्ब रामायण, केरल में राम वर्मा द्वारा रचित ‘राम चरितम्’ तेलुगू भाषा में ”रंगनाथ रामायण”, कर्नाटक में नागचंद्र पंप की ‘पंप रामायण’, गुजरात में गिरधर दास की ‘गिरधर रामायण’, उड़ीसा में बलराम दास कृत ‘रामायण’ ,असम में माधव कांडली की ‘रामायण’ ,अवधी में तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ लिखी गई। जिनका मूल स्रोत वाल्मीकि रामायण ही है। यह जानकर बड़ा आश्चर्य होता है कि भारत में अपभ्रंश और प्राकृतिक भाषाओं में रचित जैन रामायणों के अतिरिक्त प्रायः सभी भारतीय लोक भाषाओं की राम -कथाओं की रचना से पूर्व भारत से हजारों मील दूर इंडोनेशिया में भी रामायण की रचना की गई और एक बड़ा आश्चर्य है यह भी है कि उत्तर भारत में सर्वाधिक प्रचलित तुलसीदास कृत रामचरितमानस से 700 वर्ष पूर्व इंडोनेशिया में यह महाकाव्य लिखा जा चुका था। यह सुखद आश्चर्य है कि जब नवीं शताब्दी में महाकवि योगीश्वर ने ‘रामायण काकावीन’ की रचना की तो लगभग उसी काल में इंडोनेशिया के मध्य जावा क्षेत्र में प्राम्बानन स्थित हिंदू मंदिरत्रयी ब्रह्मा, विष्णु और शंकर के एक-एक मंदिरों का निर्माण हुआ और शंकर और ब्रह्मा के मंदिरों की वाह्य भित्तियों पर संपूर्ण रामायण की कथा मूर्तियों के माध्यम से प्रस्तुत की गई जो वहां की रामायण काकावीन पर आधारित है। रामायण काकावीन मूल कावी भाषा का हिन्दी अनुवाद है।
जिस प्रकार 16वीं शताब्दी में महाकवि तुलसीदास ने वाराणसी के असि घाट पर रामचरितमानस पर आधारित रामलीला प्रारंभ की थी उसी प्रकार प्राम्बानन के शिव मंदिर के पीछे रामायण काकावीन पर आधारित राम कथा का मंचन पूर्णिमा की रातों में खुले मंच पर नवीं शताब्दी से ही प्रारंभ हो गया था जिसका मंचन आज भी होता है जिससे हम भारतवासी प्राय अनभिज्ञ है काकावीन रामायण मूल कावी भाषा का हिंदी अनुवाद है जिससे भारत और इंडोनेशिया के मध्य सांस्कृतिक- एकता आज भी स्थापित है। राम और रामायण किसी न किसी रूप में वर्तमान कंबोडिया, सुमात्रा, जावा, थाइलैंड आदि में स प्रचलित है इससे स्पष्ट है कि रघुवंश और वाल्मीकि के राम भी वहां पहुंचे।
भगवान राम के चरित्र पर आधारित विश्व में लगभग 300 प्रकार की रामायण है पर वास्तविक आधार वाल्मीकि रामायण माना जाता है । आर्य समाज के अनुसार भगवान राम का आविर्भाव ईसा से कई लाख साल पहले का है।
वाल्मीकि का प्रभाव चंपा आज का वियतनाम में भी सातवीं सदी से था।यहां उनका एक मंदिर बनाया गया। दक्षिण- पूर्व एशिया की सभ्यता और संस्कृति भारतीय सभ्यता की ही देन है। वाली में प्रचलित रामायण संस्कृत भाषा में है इसका नाम ‘चरित्र रामायण’ है। विशेष कर जावा और वाली में महाकाव्य रामायण और महाभारत अत्यधिक लोकप्रिय है काकावीन रामायण जावा की भाषा कावी का हिंदी रूपांतरण है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यूनेस्को भी राम का देश थाईलैंड को मानता है औरराम के लिए ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ थाईलैंड के राजा को मिलता है जबकि थाईलैंड बौद्ध देश है और इंडोनेशिया एक मुस्लिम राष्ट्र है। इंडोनेशिया के मुस्लिम यह मानते हैं कि राम उनके पूर्वज हैं। विश्व के 182 देशों में राम की पूजा होती है वहां ‘अच्छा मनुष्य बनने के लिए रामायण पढ़ते हैं।’ हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान “कामिल बुल्के” ने 1982 में एक लेख में लिखा है कि जब हमने जावा के एक गांव में मुस्लिम शिक्षक को रामायण पढ़ते देखा और पूछा तो उन्होंने कहा कि ‘मैं और अच्छा मनुष्य बनने के लिए रामायण पढ़ता हूं।’ दुनिया भर में 300 से ज्यादा रामायण लिखे जा चुके हैं और प्रचलित हैं। भारत के अलावा कंबोडिया, इंडोनेशिया, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, चीन, मलेशिया, श्रीलंका, वाली, जावा, सुमात्रा, लॉओस कंप्यूचिया और थाईलैंड देश की लोक -संस्कृति के ग्रन्थों में राम याद किए जाते हैं।
वैसे तो कम्बोडिया के अंकोरवाट में जिसका पुराना नाम यशोधरपुर था (1112-53)ई.के मध्य सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में विश्व का विशाल हिन्दू मंदिर मीकांग नदी के किनारे सिमरिप शहर में बना है जो आज भी संसार का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर है यह सैकड़ों वर्ग मील में फैला हुआ है। वहां के राष्ट्र के सम्मान के प्रतीक इस मंदिर कम्बोडिया के राष्ट्रध्वज में भी स्थान दिया गया है। यह मंदिर युनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में से एक है।
वैसे यह भगवान विष्णु का विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर है।
विश्व के 60 देशों में राम कथा होती है और 40 देशों में राम लीला खेली जाती है राम भारत को विश्व गुरु बनाते हैं।राम ने सामाजिक रिश्तों की मानवीयता के सिद्धांतों एवं मूल्यों को स्थापित कर उन्हें नैतिक आधार प्रदान किया।
इसी प्रकार विश्व के 182 देशो में हिन्दू हैं जो राम की पूजा करते हैं इन देशोंमें होली ,दीवाली दशहरा आदि त्योहार मनाते हैं। इनमें प्रमुख देश हैं जापान,चीन,मारीशस, सूरीनाम
लाओस, थाइलैंड, कम्बोडिया, म्यांमार,इन्डोनेशिया आदि।
इससे स्पष्ट है कि राम विश्व में व्याप्त हैं

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