दुःख भी होते हैं लाजवाब,
इसका नहीं है कोई जवाब,
बिन मांगे ही सब पा जाते हैं,
हम आप हों या कोई ज़नाब।
दुख की तकलीफ कही ना जात,
दुख से सभी चाहत निजात,
आशक्ति दुखों का कारण है,
पर,आशक्ति दूर मन से न जात ।
दुख के होते हैं पाँच प्रकार,
तन मन धन बुद्धि व आध्यात्मिक विकार,
दूर नहीं दुख से जग कोई,
दुख भी सुख सा जीवन अधार।
दुःख भी बड़े अच्छे होते हैं,
जो थोड़े दिन को आते हैं,
अपना पराया कौन जगत में,
दुःख ही हमें बतलाते हैं ।
हे प्रभु दुःख जब जिसको देना,
संग सहनशक्ति खूब देना,
तुझे भुलाए नहीं ‘बेचारा’,
कृपालु कृपा इतनी कर देना।
*एडवोकेट सुनील श्रीवास्तव ‘बेचारा’*
दादरा मुसाफिरखाना अमेठी
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