रिपोर्ट कालिन्दी तिवारी संतकबीरनगर
सन्तकबीरनगर – विकास खंड नाथनगर के अंतर्गत महुली में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्री अयोध्या धाम से आए कथा प्रवक्ता आचार्य धरणीधर जी महाराज ने कहा कि आपकी देह आत्मा का साथ नहीं दे सकती तो सांसारिक धन, संपदा जैसी अन्य त्याज्य वस्तुओं का क्या मोल है। यह सभी सर्वथा त्याज्य है। इनको त्यागेंगे तो ही शांति मिलेगी क्योंकि त्याग में ही शांति है। आदमी धन-संपदा, पद और बल से नहीं चमकता है बल्कि ईश्वर की नजर पडऩे पर चमकता है।व्यासपीठ से पाण्डाल में उपस्थित श्रद्धालुओं में राष्ट्र भक्ति की अलख जलाते हुए कहा कि जो व्यक्ति राष्ट्र, समाज, परिवार के उत्थान का चिंतन नहीं करता वह जिंदा पशु के समान होता है। कथा वाचन के पांचवे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लिलाओं का वृतांत सुनाया। इस गोकुल रूपी शरीर में भगवान का आगमन हो जाता है तो जीव के जीवन में आनन्द ही आनन्द जाता है। अधर्म के कारण जीवन दूषित हो जाता है और जो उस जीवन के निकट आता है उसका पतन हो जाता है। कथा में इस वक्त को समझाते हुए कालिए नाग की कथा को सुनाया और समझाया कि कालिया अधर्म है और जीवन की यमुना में प्रवेश करते ही जीवन दूषित हो जाता है और जो व्यक्ति स्पर्श में आता है उसका पतन हो जाता है।
आचार्य धरणीधर जी महाराज ने कहा जब तक जीवन में वासना का पर्दा या माया का वस्त्र पड़ा रहेगा जीव ईश्वर का दर्शन नहीं कर सकता। अतः गोपी रुपी जीव को ईश्वर का दर्शन प्राप्त हो इसलिए भगवान ने गोपियों के वस्त्र हरण की लीला की। वह वस्त्र केवल माया ही है जिसे भगवान ने उठाया है और जब माया हट जाती है तो ईश्वर मिल जाते है। गोवर्धन लीला कथा सुनाते हुए बताया कि आत्मा रुपी भगवान जब तक इस गोवर्धन रुपी शरीर को उठाए है तब तक सब कुछ ठीक है और जैसे ही भगवान इस गोवर्धन रुपी शरीर का त्याग करते है वैसे ही यह शरीर मृत हो जाता है। इस अवसर पर परशुराम मिश्र,राम चन्द्र मिश्र,हरिप्रसाद द्विवेदी,अविनाश मिश्र,स्कंद मिश्र,नीरज मिश्र, वाचस्पति दुबे,अनंत दुबे,राजाराम दुबे, कृष्ण देव दुबे,जनार्दन दुबे,आषीश दुबे,बालमुकुंद दुबे, नवीन मिश्र समेत तमाम लोग मौजूद रहे।