अनुराग लक्ष्य, 30 नवंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
,, शहे बग़दाद के आका मेरे महबूब ए सुबहानी
दो आलम में भी हैं आला मेरे महबूब ए सुबहानी
यकीं है जाऊंगा जिस दिन सलीम बगदादी चौखट पर
बदल जायेगा यह खाका मेरे महबूब ए सुबहानी,,
सुब्हान अल्लाह, कितनी खुशकिस्मत है यह सरजमीं हिंदुस्तान, जिस पर शहज़ाद ए गौसे आज़म के मुबारक कदम पड़ गए हैं।
हिंदुस्तान की वोह मुबारक सरजमीन का नाम है बदायूं शरीफ, जहां 29 नवंबर से 2 दिसंबर तक चलने वाले आलमी कांफ्रेंस में खेताब फरमाने के लिए शहज़ाद ए गौस ए आज़म नकीबुल अशरफ हज़रत सैयदना मौलाना शेख़ सैय्यद अफीफुद्दीन जीलानी कादरी, सज्जादा आस्ताना ए गौस ए आज़म बग़दाद शरीफ उर्स कादरी बदायूं शरीफ में 29 नवंबर से 2 दिसंबर तक चलने वाले आलमी जलसे को खेताब करने के लिए तशरीफ ला चुके हैं।
आपको बताते चलें कि बदायूं शरीफ, जिसे हम और आप मदीनातुल औलिया के नाम से भी जानते हैं। यहां की हर गली, हर गोशे में कोई न कोई बुजुर्ग हस्ती जलवा अफ़रोज़ है।
उर्स कादरी 30 नवंबर से शुरू हो रहा है और 2 दिसंबर को खत्म होगा। जिसमें खुसूसी मेहमान, बतौर मुख्य अतिथि शहज़ाद ए गौस ए आज़म हज़रत शेखुल सैय्यद अफीफुद्दीन कादरी जीलानी दामत बरकातुहू स्टेज पर जलवा अफ़रोज़ होंगे। जिसमें हज़ारों हज़ार की तादाद में शिरकत करने वाले अकीदत मंदों का एक हुजूम देखने को मिलेगा।
