महात्मा गांधी प्राकृतिक जीवन-पद्धति के प्रबल समर्थक थे : प्रो. डॉ. नवीन सिंह

महात्मा गांधी प्राकृतिक जीवन-पद्धति के प्रबल समर्थक थे : प्रो. डॉ. नवीन सिंह

 

 

बस्ती। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह ने दोनों महापुरुषों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके जीवन और विचारों को वर्तमान समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

 

प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी केवल स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक ही नहीं, बल्कि प्रकृति-सम्मत जीवन-पद्धति के प्रबल समर्थक भी थे। उन्होंने अपने जीवन में प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न सिद्धांतों को अपनाया और आहार, उपवास, स्वच्छता, श्रम, जल, मिट्टी, वायु तथा सूर्य के संतुलित उपयोग को स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना। गांधी जी का जीवन इस बात का संदेश देता है कि स्वस्थ रहने के लिए प्रकृति के नियमों के अनुरूप संयमित एवं अनुशासित जीवन जीना आवश्यक है।

 

उन्होंने कहा कि गांधी जी स्वास्थ्य को केवल बीमारी से मुक्त रहने तक सीमित नहीं मानते थे, बल्कि शरीर और मन के संतुलन को भी महत्वपूर्ण समझते थे। आज के दौर में अनियमित दिनचर्या, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव और असंतुलित खान-पान जैसी जीवनशैली संबंधी चुनौतियों के बीच गांधी जी के प्रकृति-सम्मत जीवन के विचार विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।

 

प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के आदर्श प्रतीक थे। उनका पूरा जीवन राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देशवासियों को कठिन परिस्थितियों में आत्मनिर्भरता और राष्ट्रहित के लिए त्याग की प्रेरणा दी। उनका प्रसिद्ध नारा “जय जवान, जय किसान” देश की सुरक्षा और कृषि के महत्व को रेखांकित करता है।

 

उन्होंने कहा कि दोनों महापुरुषों का जीवन आज की पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है। गांधी जी से स्वच्छता, संयम, प्रकृति के प्रति सम्मान और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा मिलती है, वहीं शास्त्री जी सादगी, अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा का मार्ग दिखाते हैं।

 

प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने 2 अक्टूबर के अवसर पर लोगों से स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने, स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने, योग एवं प्राकृतिक जीवन-पद्धति को दैनिक जीवन में स्थान देने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया।

 

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हम उनके आदर्शों को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने आचरण और जीवनशैली में उतारने का प्रयास करें।