स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ फसल और बेहतर भविष्य का आधार
*एस के यादव-बहराइच:-*की मिट्टी हमारे जीवन का आधार है। हमारा जीवन मिट्टी से प्रारंभ होता है और अंततः इसी मिट्टी में विलीन हो जाता है। मिट्टी हमारे भोजन और अनेक औषधियों का प्रमुख स्रोत है। इतना ही नहीं, वर्षा के जल को प्राकृतिक रूप से अपनी विभिन्न परतों से छानकर उसे भूजल के रूप में उपयोगी बनाने में भी मिट्टी की महत्वपूर्ण भूमिका है।अक्सर लोग मिट्टी को ईश्वर प्रदत्त ऐसा संसाधन मानते हैं, जो हमेशा हमारे पास उपलब्ध रहेगा। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी की एक सेंटीमीटर उपजाऊ परत बनने में सैकड़ों वर्ष लग सकते हैं, जबकि अच्छी कृषि योग्य मिट्टी के निर्माण में हजारों वर्ष लग जाते हैं। आज खेतों में मौजूद उपजाऊ मिट्टी हमारे पूर्वजों की अमूल्य विरासत है,प्रगतिशील कृषक व कृषि विशेषज्ञ लालता प्रसाद गुप्ता के अनुसार अच्छी मिट्टी वही है, जिसमें फसल उत्पादन के लिए सीमित मात्रा में जैविक खाद के अतिरिक्त बाहरी इनपुट की आवश्यकता कम हो, जो वर्षा का पानी सोख सके, गर्मी में नमी बनाए रखे तथा केंचुआ और अन्य लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध हो। ऐसी मिट्टी में जैव विविधता भी बेहतर रहती है और खेतों में तितलियां तथा मधुमक्खियां जैसे परागणकर्ता दिखाई देते हैं।लेकिन रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों के असंतुलित प्रयोग तथा फसल अवशेष जलाने के कारण देश के अनेक खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। इससे मिट्टी की उर्वरता, जैविक गतिविधि और उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।विश्व मृदा दिवस के अवसर पर लालता प्रसाद गुप्ता ने किसानों से मिट्टी के स्वास्थ्य को लेकर सजग होने की अपील की। उन्होंने कहा कि मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले उसकी वास्तविक स्थिति जानना जरूरी है। इसके लिए किसान अपने खेत की मिट्टी का नियमित मृदा परीक्षण कराएं। मृदा परीक्षण से मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की स्थिति का पता चलता है और फसल के अनुसार खाद एवं उर्वरकों के संतुलित प्रयोग की योजना बनाने में मदद मिलती है।उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि अभी तक उन्होंने अपने खेत की मिट्टी की जांच नहीं कराई है तो कृषि विभाग द्वारा स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में अपनी मिट्टी की जांच अवश्य कराएं। मिट्टी को समझें, उसकी जांच कराएं और आवश्यकता के अनुसार ही पोषक तत्वों का प्रबंधन करें—यही स्वस्थ खेत और टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।