श्रीकृष्ण योगेश्वर थे रास रचैया कहकर उन्हें कलंकित नहीं किया जाना चाहिए- ओम प्रकाश आर्य

श्रीकृष्ण योगेश्वर थे रास रचैया कहकर उन्हें कलंकित नहीं किया जाना चाहिए- ओम प्रकाश आर्य

 

 

लवकुश सिंह संवाददाता

अनुराग लक्ष्य न्यूज बस्ती

 

बस्ती । स्वामी दयानंद विद्यालय सुरतीहट्टा बस्ती में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की पूर्व संध्या पर वैदिक यज्ञ कर बच्चों को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का सुझाव दिया गया। इस अवसर पर प्रधानाध्यापक आदित्य नारायण गिरि ने यज्ञ कराते हुए बच्चों को बताया कि योगेश्वर श्री कृष्ण का चरित्र अत्यंत उज्ज्वल, निष्कलंक और पुरुषोत्तम का है। महाभारत के ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर वे एक आदर्श आप्त पुरुष, महान राजनीतिज्ञ, वेद-वेदांग के ज्ञाता और धर्मसंस्थापक हैं।

प्रधानाध्यापक ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि श्री कृष्ण का जीवन श्रेष्ठ ब्रह्मचर्य का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने महर्षि सांदीपनि के गुरुकुल में रहकर समस्त विद्याओं का गहन अध्ययन किया था। सुदामा जी के साथ उनकी अटूट मित्रता सामाजिक समता का संदेश देती है। ओम प्रकाश आर्य प्रधान आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने कहा कि श्रीकृष्ण योगेश्वर थे रास रचैया कहकर उन्हें कलंकित नहीं किया जाना चाहिए।महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने भी ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में स्पष्ट किया है कि श्री कृष्ण का इतिहास अत्यंत उत्तम है और वे जीवनभर न्याय के मार्ग पर चले।

उन्होंने आगे कहा कि कुरुक्षेत्र के मैदान में श्री कृष्ण द्वारा दिया गया गीता का उपदेश निष्काम कर्म की प्रेरणा देता है। हमें फल की चिंता किए बिना केवल अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। श्री कृष्ण एक अखंड ब्रह्मचारी, जितेन्द्रिय और परम पवित्र महापुरुष थे; इसी श्रेष्ठता के कारण उन्हें ‘योगेश्वर’ कहा जाता है। सभी विद्यार्थियों को उनके इन आदर्शों को अपने जीवन में धारण करना चाहिए।

इस अवसर पर अनूप कुमार त्रिपाठी, अरविन्द श्रीवास्तव, नितीश कुमार, दिनेश मौर्य, महक मिश्रा, शिवांगी गुप्ता, अनीशा मिश्रा, महिमा, गुंजा देवी, ज्योति सोनी, स्वपनल और अंशिका पाण्डेय सहित विद्यालय का समस्त शिक्षक वृंद एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।