सच का दर्पण दिखा दिया* *किसने

सच का दर्पण दिखा दिया* *किसने

*सीना छप्पन‌ घटा दिया किसने*

 

*अवध वाटिका की पाक्षिक गोष्ठी में गूंजी उत्कृष्ट रचनाओं की गूंज*

 

बहराइच। अवध वाटिका साहित्य संस्थान बहराइच के तत्वावधान में आयोजित नियमित पाक्षिक कवि गोष्ठी का आयोजन सेनानी भवन सभागार बहराइच में किया गया जिसकी अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष पी0के0प्रचण्डजी जी ने की संचालन तिलक राम अजनबी ने किया तथा स्वयं के द्वारा माँ वीणा पाणि की वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद के संगठन मंत्री आदरणीय रमेश चन्द्र मिश्र जी की उपस्थिति में नवोदित रचनाकार महीप चन्द कनौजिया ने माँ को समर्पित भावपूर्ण कविता पढ़ी –

सफर में साथ चलता है असर माँ की दुआओं का,

कभी होने नहीं देता असर कड़वी हवाओं का।

शहनवाज खान ने पढ़ा -चलता नहीं हूँ मैं यूं ही झुककर,

ढूंढ रहा हूँ अपनी जवानी।

हुस्न तेरा मुमताज महल है

इश्क मेरा है शाहजहानी।

रईस सिद्दीकी ने पढ़ा –

हिंद के आइनी लुटेरों को

सच का दर्पण दिखा दिया किसने।

दौर ए हाजिर के इस इलेक्शन में

सीना छप्पन घटा दिया किसने

। कार्यक्रम का संचालन कर रहे तिलक राम अजनबी ने पढ़ा –

हर कर्मों का पाप अमर हो जाता है।

जीवन का अभिशाप अमर हो जाता है।

बच्चों के अच्छे कर्मों से अजनबी यहाँ,

दुनिया का हर बाप अमर हो जाता है ।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद के संगठन मंत्री रमेश चन्द्र मिश्र ने सभी कवियों के द्वारा सतत साहित्य सृजन के प्रयासों की सराहना करते हुए अपनी रचना पढ़ी । इस अवसर पर उपस्थित कवि सुभाषित श्रीवास्तव अकिंचन व अब्दुल रफी खान बम्पर ने भी अपनी अपनी रचना प्रस्तुत की तथा अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्था के अध्यक्ष पी0के0प्रचण्डजी ने अध्यक्षीय काव्य पाठ करते हुए पढ़ा –

तुम भी मुझसे दूर रहे हो, मैं भी तुमसे दूर रहा हूँ।

कुछ तुम भी मजबूर रहे हो,

कुछ मैं भी मजबूर रहा हूँ।

तनहाई में हम दोनों की एक

ही जैसी हालत है,

तुम भी गम से चूर रहे हो,मैं भी गम से चूर रहा हूँ।

अंत में उपस्थित सभी कवि एवं साहित्य प्रेमी बंधुओं की सराहना की तथा आभार प्रकट किया इस अवसर पर अन्य तमाम साहित्य प्रेमी बंधु उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम का आनन्द प्राप्त किया।