बस्ती के तीन नगीने, डॉ राम कृष्ण लाल जगमग, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी और विनोद कुमार हर्षित,,,,,,

अनुराग लक्ष्य 6 अगस्त
पूर्वांचल का बस्ती जनपद यूँ तो हमेशा से ही साहित्य और अदब की मिसाल रहा है। जिसमें आचार्य शुक्ल, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, अख्तर बस्तवी, जिगर बस्तवी और बाल सोम गौतम जैसे कवियों और शायरों ने अहम भूमिका निभाई।
खुशी की बात है कि आज की पीढ़ी में भी बस्ती की साहित्यिक गतिविधियों के भीष्म पितामह डॉ राम कृष्ण लाल जगमग, पूर्वांचल के कोहनूर शायर और गीतकार सलीम बस्तवी अज़ीज़ी, और विनोद कुमार हर्षित के नाम से भी जाना जाता है, जो बस्ती जनपद के लिए एक सुखद एहसास है।
डॉ राम कृष्ण लाल जगमग जहां पिछले 50 वर्षों से अपने दुमदार दोहों, अपने हास्य व्यंग की शैली के अतिरिक्त गंभीर रचनाओं के लिए देश के कोने कोने में जाने और पहचाने जाते हैं। वहीं बस्ती की साहित्यिक गतिविधियों के मुख्य आयोजकों में भी उनका शुमार होता है। जिसमें देश और विदेश के रचनाकारों को आमंत्रित करके बस्ती का नाम रोशन कर रहे हैं।
श्री जगमग नेपाल और भूटान जैसे देशों में भी अपनी साहित्यिक ऊर्जा को कई बार साबित कर चुके हैं।
लगभग एक दर्जन काव्य संग्रह के रचयिता डॉ राम कृष्ण लाल जगमग की प्रकाशित ,चाशनी, दुम दार दोहों का संकलन अत्यधिक पसंद किया गया। इसके अतिरिक्त हास्य व्यंग की 6 संस्करण भी आ चुके हैं। साथ ही किसी की दिवाली किसी का दिवाला, विलाप खंडकाव्य, हम तो केवल आदमी हैं, सच का दस्तावेज़, खुशियों की गौरैया, बाल सुमन, बाल काव्य, बाल चेतना, नन्हें मुन्नों का संसार के द्वारा साहित्य जगत के महान कवियों में शुमार हो गए।
वहीं दूसरी तरफ अनेकों खेताबों से नवाज़े जाने वाले पूर्वांचल के कोहनूर शायर सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने भी पिछले 30 वर्षों से जो साहित्य और अदब की खिदमत को अंजाम दे रहे हैं। वोह किसी से भी छिपा नहीं है। साहित्यिक संस्था जागृति और अदबी बज़्म के संस्थापक के रूप में अनेकों कवि सम्मेलन और मुशायरे आयोजित करके बस्ती के दर्जनों नए रचनाकारों को स्थापित करके उन्हें मंच प्रदान किया। सलीम बस्तवी अज़ीज़ी देश प्रदेश के कवि सम्मेलन और मुशायरों में अपनी दमदार आवाज़ और अपने दमदार कलाम के लिए हमेशा सुर्खियों में रहे । साथ ही आज की तारीख़ में मुंबई जैसी आर्थिक नगरी में साहित्य और अदब में लीन होते पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने वजूद को कायम किए हुए हैं।
इसी के साथ नई पीढ़ी के एक ऐसे शायर का ज़िक्र करना यहाँ बेहद ज़रूरी हो जाता है, दुनिया ए अदब जिसे विनोद कुमार ,हर्षित, के नाम से जानती और पहचानती है। पत्रकारिता जैसे पेशे की जिम्मेदारी को निभाते हुए वोह आज एक खूबसूरत शायरों की फेहरिस्त में आते हैं। जो वर्तमान में अनुराग लक्ष्य के संपादक और बस्ती प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी हैं।
संगीत विधा में पारंगत विनोद कुमार हर्षित आज की तारीख़ में देश के बड़े बड़े कवि सम्मेलन और मुशायरे में बराबर शिरकत कर रहे हैं, जो उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है ।
आश्चर्य की बात यह है कि एक गायक, एक पत्रकार और एक शायर जब तीन भूमिकाएं एक साथ निभाता है तो यह कितना जोखिम भरा कार्य लगता है, लेकिन विनोद कुमार हर्षित इन तीनों विधाओं में आज की तारीख़ में अत्यंत सफ़ल हैं।