बाराबंकी की सरज़मीन पर देवा शरीफ का 125 वाँ उर्स मुबारक आज से, ज़ायरीनों की होंगी मुरादें पूरी,,,,,

अनुराग लक्ष्य, 13 जुलाई
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
,,मेरे बुजुर्गो के सर की पगड़ी जो हो सके तो बचाए रखना
दिलों में उनकी नसीहतों के जो फ़ूल हैं वोह खिलाए रखना
यह वक्त ऐसा ही आ गया है कि फ़िक्र करने की है ज़रूरत
किसी भी सूरत में अपने घर को मुहब्बतों से सजाए रखना,,
मैं सलीम बस्तवी अज़ीज़ी आज अपने इस कलाम से इस ख़बर की शुरुआत इस लिए की है कि हिंदुस्तान की सरजमीन बुजुर्गों, वालियों और सूफी संतों का देश सदियों से रहा है।
बग़दाद की सरजमीन पर सारे वलियों के बादशाह सरकार गौस ए पाक इस बात का सबूत हैं । कि जब तक दुनिया क़ायम ओ दायम रहेगी, बुजुर्गों की चौखट से अल्लाह की मखलूक को फैज़ पहुंचता रहेगा।
उसी सिलसिले के बुज़ुर्ग और वली शहंशाह ए देवा सरकार वारिस पाक भी आते हैं। जिनका 125 वाँ उर्स मुबारक आज 13 जूलाई से 16 जूलाई तक चलेगा। जिसमें हिंदुस्तान के कोने कोने से उनके चाहने वालों का, और उनसे अकीदत रखने वालों एक हुजूम देखने को मिलेगा।
सरकार गौस ए पाक से विलायत का यह सिलसिला शहंशाह ए हिंदुस्तान ख्वाजा ग़रीब नवाज से होते हुए सरकार मखदूम अशरफ सिमनानी, सरकार गाज़ी और सरकार वारिस पाक पर ही खत्म नहीं होता बल्कि हिंदुस्तान के हर एक शहर में अल्लाह के बुजुर्ग वालियों ने मखलूक की भलाई और इंसानियत की शमां रोशन करने में अपनी पूरी जिंदगी सर्फ़ कर दी।
उसी तरह आज सरकार वारिस पाक भी अपनी रूहानी फैज़ से अपने चाहने वालों के लिए एक मिसाल बने हुए हैं।