लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन CY-VAJRA के तहत कमिश्नरेट लखनऊ पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए नौ साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह देशभर में साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) के माध्यम से इकट्ठा कर उसे USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित करता था और बाद में विदेशी, विशेष रूप से चीनी साइबर अपराधियों के डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर कर देता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 50 एटीएम एवं क्रेडिट कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, 53,100 रुपये नकद, एक कार और एक मोटरसाइकिल सहित साइबर अपराध से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं।यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा द्वारा संचालित ऑपरेशन CY-VAJRA के तहत की गई। पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन में डीसीपी उत्तरी, एडीसीपी उत्तरी, एसीपी अलीगंज, क्राइम ब्रांच, साइबर टीम और थाना मड़ियांव पुलिस की संयुक्त टीम ने एनसीआरपी और जेएमआईएस पोर्टल पर प्राप्त संदिग्ध म्यूल अकाउंट्स का सत्यापन करते हुए इस संगठित गिरोह का खुलासा किया।पुलिस के अनुसार 12 जुलाई 2026 को क्राइम ब्रांच की टीम जेएमआईएस समन्वय पोर्टल से प्राप्त म्यूल अकाउंट्स का सत्यापन कर रही थी। इसी दौरान केशव नगर मोड़ के पास एक संदिग्ध युवक मो. शाहरूख को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने अपना बैंक खाता साइबर ठगी के लिए उपलब्ध कराया था और अपने अन्य साथियों के आईआईएम रोड क्षेत्र में मौजूद होने की जानकारी दी। इसके बाद क्राइम ब्रांच, साइबर टीम और थाना मड़ियांव पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आईआईएम रोड सर्विस लेन से कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 50 एटीएम एवं क्रेडिट कार्ड, तीन चेकबुक, दो पासबुक, एक टैबलेट, एक आईपैड, 53,100 रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त कार संख्या UP32FB8191 तथा मोटरसाइकिल संख्या UP32GA4936 बरामद की गई। पुलिस ने इन सभी सामानों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।पुलिस की पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण में सामने आया कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर एवं भोले-भाले लोगों को धन का लालच देकर उनके नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाता था। खाते खुलने के बाद उनसे एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, इंटरनेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड, मोबाइल नंबर और ओटीपी सहित पूरी बैंकिंग जानकारी अपने कब्जे में ले ली जाती थी। इसके बाद इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम सबसे पहले इन्हीं खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद आरोपी विभिन्न एटीएम से नकद निकासी करते या रकम को कई अन्य खातों में स्थानांतरित कर देते थे, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह केवल नकद निकासी तक सीमित नहीं था, बल्कि ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी USDT में परिवर्तित कर विदेशी साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का भी काम करता था।पुलिस के अनुसार साइबर ठगी की धनराशि को पहले विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से एकत्र किया जाता था, फिर उसे डिजिटल माध्यमों से USDT में बदला जाता था। इसके बाद यह क्रिप्टोकरेंसी विदेशी, विशेष रूप से चीनी साइबर अपराधियों अथवा उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित डिजिटल वॉलेट में भेज दी जाती थी। इस पूरे नेटवर्क में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को उसकी भूमिका के अनुसार कमीशन दिया जाता था। गिरोह के सदस्य टेलीग्राम सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विदेशी साइबर अपराधियों के लगातार संपर्क में रहते थे और बैंक खातों, ट्रांजैक्शन तथा निकासी से जुड़ी सूचनाएं साझा करते थे।पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे आजम और अब्दुल नामक व्यक्तियों के माध्यम से इस नेटवर्क से जुड़े थे। इन्हीं के निर्देश पर अलग-अलग जनपदों में बैंक खाते खुलवाए जाते थे और बाद में उन खातों का पूरा नियंत्रण गिरोह अपने हाथ में ले लेता था। साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को नकद निकालने अथवा क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजने का पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था।पुलिस ने इस मामले में थाना मड़ियांव में भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(2), 318(4), 3(5), 111(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-सी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है। साथ ही उनके आपराधिक इतिहास, बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, वित्तीय लेन-देन, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, टेलीग्राम चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।पुलिस का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और गिरोह के अन्य सदस्यों, विदेशी संपर्कों, धन के अंतिम लाभार्थियों तथा पूरे अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पता लगाने के लिए विस्तृत विवेचना जारी है। संभावना है कि इस जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।इस उल्लेखनीय सफलता पर डीसीपी उत्तरी ने संयुक्त पुलिस टीम को 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।कमिश्नरेट पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, इंटरनेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड या ओटीपी किसी भी परिस्थिति में उपलब्ध न कराएं। लालच में आकर अपने बैंक खाते का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति को न करने दें। किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी निवेश अथवा साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।