जल सुरक्षा का नया ग्रामीण मॉडल: जब जल समितियां बनेंगी प्रोफेशनल ‘वॉटर यूटिलिटी’ – डॉ. अनिल प्रताप सिंह

भारत सरकार के जल जीवन मिशन ने देश के ग्रामीण अंचलों में पाइपलाइनों और नलों का एक विशाल बुनियादी ढांचा (Infrastructure) खड़ा कर दिया है। ग्रामीण भारत के इतिहास में यह पानी पहुंचाने का सबसे बड़ा अभियान है। लेकिन इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव अब शुरू होता है—इस बुनियादी ढांचे की निरंतरता (Sustainability) और पानी की शुद्धता को हमेशा के लिए बनाए रखना।
अक्सर देखा गया है कि पाइपलाइनें बिछ जाती हैं, स्रोत बन जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद रखरखाव के अभाव में या जल स्रोतों के सूखने से व्यवस्था प्रभावित होने लगती है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी ‘यूनोप्स’ (UNOPS) के कंट्री मैनेजर श्री विनोद मिश्रा के साथ ‘ग्रीन टॉक’ मंच पर हुई एक विशेष चर्चा से ग्रामीण जल सुरक्षा और वॉटर गवर्नेंस का एक बेहद व्यावहारिक और क्रांतिकारी ब्लूप्रिंट उभरकर सामने आया है। इस विमर्श का मूल मंत्र है—”गांवों को प्रोफेशनल वॉटर यूटिलिटीज में बदलना।”
क्या है ग्रामीण ‘वॉटर यूटिलिटी’ का सिद्धांत?
शहरी क्षेत्रों में म्युनिसिपल कॉरपोरेशन या जल संस्थान एक ‘यटिलिटी’ के रूप में काम करते हैं। वे नागरिकों को पानी देने की गारंटी देते हैं, गुणवत्ता जांचते हैं, मरम्मत करते हैं और बदले में यूजर चार्ज (जल मूल्य) वसूलते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक रूप से ऐसी कोई संगठित व्यवस्था नहीं रही है।
जल जीवन मिशन 2.0 की गाइडलाइंस में इसका एक स्पष्ट कानूनी समाधान दिया गया है—विलेज वॉटर सैनिटेशन कमेटी (VWSC) यानी ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति। यह समिति ग्राम पंचायत की ही एक विधिक संस्था (Legal Body) है। गांवों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब इन समितियों को महज़ एक ‘कागजी ढांचा’ न रखकर एक पेशेवर ‘वॉटर यूटिलिटी ऑपरेटर’ के रूप में ढालना होगा, ताकि वे ठीक वैसे ही काम कर सकें जैसे शहरों में जल निगम करते हैं।
जल सुरक्षा के तीन स्तंभ और यूनोप्स (UNOPS) के इनोवेटिव टूल्स
वॉटर गवर्नेंस केवल नल लगाने तक सीमित नहीं है। सच्ची जल सुरक्षा के तीन अनिवार्य स्तंभ हैं: एक्सेसिबिलिटी (समान पहुंच), अवेलेबिलिटी (पर्याप्त उपलब्धता – 55 LPCD) और वॉटर क्वालिटी (शुद्धता)। इन तीनों लक्ष्यों को धरातल पर उतारने के लिए यूनोप्स ने कुछ बेहद सफल पार्टिसिपेटरी टूल्स (Participatory Tools) विकसित किए हैं, जिन्हें देश के गांवों में लागू किया जा रहा है:
• CLoNB (Community Leave No One Behind): सतत विकास लक्ष्य (SDG 6) की आत्मा है—’लीव नो वन बिहाइंड’ यानी कोई पीछे न छूटे। यह टूल ग्रामीण समुदाय को खुद अपनी स्थिति का आकलन करने और हाशिए पर मौजूद अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से (Equity) पानी की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सक्षम बनाता है।
• CLASS (Community Led Action for Sanitary Surveillances): पानी अगर शुद्ध नहीं है, तो वह बीमारियों का घर बन जाता है। इस टूल के माध्यम से ग्रामीण समाज को व्याख्यान देने के बजाय, सहभागी तरीके से यह सिखाया जाता है कि पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल और Chemical टेस्टिंग क्यों जरूरी है और वे खुद सेनेटरी सर्वे कैसे कर सकते हैं।
• पानी पंचायत और वॉटर बजटिंग (Water Budgeting): हम पानी बना नहीं सकते, केवल बचा सकते हैं। इस टूल के जरिए ग्रामीण खुद अपने गांव का ‘वॉटर बजट’ तैयार करते हैं—यानी बारिश से कितना पानी मिला, कितना रिचार्ज हुआ और खेती व पीने में कितना खर्च हुआ। यदि बजट माइनस में है, तो गांव वाले पहले से ही ‘कैचमेंट एरिया प्रोटेक्शन’, मेड़बंदी और जल संरक्षण के उपाय शुरू कर देते हैं ताकि भविष्य के जल संकट से बचा जा सके।
विलेज वॉटर यूटिलिटी के चार स्तंभ (Capacity Building Plan)
ग्राम प्रधानों और जल समितियों के सदस्यों को एक कुशल ऑपरेटर बनाने के लिए चार स्तरों पर क्षमता संवर्धन (Capacity Building) अनिवार्य है:
• संस्थागत मजबूती (Institutional Strengthening): जल समितियों की बैठकें औपचारिक और नियमित हों, मिनट्स दर्ज किए जाएं और इनका बजट ग्राम सभा से विधिवत पास हो।
• तकनीकी सुदृढ़ीकरण (Technical Strength): गांवों में प्लंबर, फिटर और मैकेनिक्स की अपनी एक प्रशिक्षित टीम हो। इससे न केवल मरम्मत के लिए बाहर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिलेगा।
• वित्तीय आत्मनिर्भरता (Financial Strength): 15वें वित्त आयोग से मिलने वाले फंड का पेयजल व स्वच्छता में सही नियोजन हो। साथ ही, गांव के स्तर पर पारदर्शी तरीके से ‘यूजर चार्ज’ का कलेक्शन और मैनेजमेंट हो, जिसका अपना बैंक खाता हो।
• पर्यावरणीय योजना (Environmental/Climate Resilience Plan): समितियों को पता होना चाहिए कि उनके गांव में सूखे या बाढ़ का क्या इतिहास रहा है, ताकि वे जलवायु परिवर्तन के दौर में अपने वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर को उसी अनुरूप ढाल सकें।
एक व्यक्तिगत संकल्प की जरूरत
सच्ची कम्युनिटी ओनरशिप तब तक नहीं आ सकती जब तक कि इसे हर नागरिक अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी (Personal Responsibility) न मान ले। धरती पर मीठे पानी के संसाधन बेहद सीमित और अनमोल हैं। जल संरक्षण की शुरुआत हमें अपने घरों से—ब्रश करते समय नल बंद रखने, शावर की जगह बाल्टी का इस्तेमाल करने जैसे छोटे-छोटे दैनिक अभ्यासों से करनी होगी।
जल जीवन मिशन द्वारा निर्मित इस अभूतपूर्व बुनियादी ढांचे को दीर्घायु बनाने का एकमात्र रास्ता यही है कि हम ग्राम स्तर पर मजबूत वॉटर गवर्नेंस का निर्माण करें। जब देश का हर गांव अपनी पानी की व्यवस्था खुद संभालने वाली एक आत्मनिर्भर और प्रोफेशनल ‘वॉटर यूटिलिटी’ बन जाएगा, तभी हम आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और समृद्ध जल-विरासत सौंप पाएंगे।
(लेखक Munsif TV पर प्रसारित कार्यक्रम “Green Talk with Anil Pratap Singh” के होस्ट, ग्लोबल साइंस एकेडमी के फाउंडर डायरेक्टर, पर्यावरणविद और सार्वजनिक नीति के विशेषज्ञ हैं। इस विषय पर विस्तृत चर्चा और वीडियो संदर्भ इस लिंक पर उपलब्ध है