*सफलता की कहानी-*

*सफलता की कहानी-*
बस्ती 03 जून 2026 सू.वि., ग्रामीण/गाँव/आदिवासी आधारित पर्यटन ग्रामीण पर्यटन पहलों में ग्रामीण परिवेश में पर्यटकों की सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाती है, साथ ही उन्हें रहने और खाने की सुविधाएँ भी प्रदान की जाती हैं। जिन गाँवों की पहचान उनके हथकरघा, हस्तशिल्प और इसी तरह की अन्य कलाओं में उनकी विशेषज्ञता के लिए है, उन्हें उत्पादकों को सहायता देने, पारंपरिक कौशलों को संरक्षित करने और पर्यटकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया जाता है।
जनपद बस्ती में, दो गाँवों बढ़नी मिश्र व अमोढ़ा खास को ग्रामीण पर्यटन विकास के लिए चिह्नित किया गया है।
बढ़नी मिश्र गाँव का ऐतिहासिक महत्व है, प्राचीन ग्रंथों मे इस गाँव को रामायण कालीन भगवान राम के गुरु वशिष्ठ मुनि का मूल निवास माना जाता है। जिसके कारण स्थानीय लोगों द्वारा जनपद के प्राचीन नाम को वशिष्ठी बताया जाता है।
अमोढ़ा खास गाँव जनपद बस्ती का सुप्रसिद्ध अमोढ़ा खास गाँव अपनी ऐतिहासिकता एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। अमोढ़ा के राजा जालिम सिंह व उनकी पत्नी रानी तलाश कुवरी द्वारा सन 1857 ई मे ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध संग्राम किया गया था जिसके साक्ष्य के रूप मे राजा जालिम सिंह के किले का अवशेष इस गाँव मे स्थित है। उक्त गाँव मे चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग का प्रसिद्ध पड़ाव राम रेखा मंदिर व चतुर्भुजी मंदिर भी स्थित है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग, इन दोनों गाँवों के स्थानीय निवासियों के बीच कौशल विकास को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है; इसके लिए विभाग द्वारा हस्तशिल्प-आधारित विभिन्न पहलुओ की शुरुआत की गई है। वर्तमान में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, और होमस्टे सुविधाओं के लिए कुछ विशिष्ट स्थलों की पहचान भी कर ली गई है। इन प्रयासों का उद्देश्य भविष्य में पर्यटकों को एक समग्र और गहन पर्यटन अनुभव प्रदान करना है।
पर्यटन नीति नई पर्यटन नीति 2022 में उभरते हुए रुझानों और विभिन्न हितधारकों जिनमें पर्यटन एवं आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्र के संगठन भी शामिल हैं से प्राप्त सुझावों को समाहित किया गया है। इस अद्यतन नीति का मुख्य ज़ोर ‘ज़िला संवर्धन परिषद‘ (District Promotion Council) और ‘नीति कार्यान्वयन समिति‘ के माध्यम से नीति के क्रियान्वयन को सरल बनाने पर है; साथ ही, राजस्व, नगर विकास, आवास और स्थानीय स्वशासन जैसे विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करना और उत्तर प्रदेश के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों को ‘प्रमुख पर्यटन स्थलों‘ (Focus Tourist Destinations) के रूप में नामित करना भी इस नीति के प्रमुख उद्देश्य हैं।
जनपद बस्ती में, ‘पर्यटन नीति 2022‘ के अंतर्गत अब तक लगभग 28 नई पर्यटन इकाइयों (जैसे होटल, बजट होटल, कन्वेंशन सेंटर, मार्गस्थ सुविधा केंद्र आदि) का पंजीकरण किया जा चुका है; इन इकाइयों में कुल मिलाकर लगभग 17415.93 लाख रुपये का निवेश किया जाना प्रस्तावित है। जिससे पर्यटन के क्षेत्र मे नए रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा पर्यटन व संस्कृति विभाग स्थानीय संस्कृति और कलाओं को उजागर करने और उनका उत्सव मनाने के लिए लगभग हर ज़िले में ‘महोत्सव/सांस्कृतिक कार्यक्रम‘ सक्रिय रूप से आयोजित कर रहा है। ये पहलें पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित करने में मदद करती हैं, साथ ही उन लोगों को आजीविका भी प्रदान करती हैं जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सहेजते और बनाए रखते हैं।
उत्तर प्रदेश दिवस, हर घर तिरंगा, संस्कृति उत्सव, नवरात्रि, वाल्मीकि जयंती आदि को हर साल संस्कृति विभाग द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
पर्यटन स्थलों का विकास पर्यटन विभाग राज्य सेक्टर की योजनाओं के माध्यम से प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास को प्राथमिकता देता है। वर्ष 2017 से लेकर अब तक, पर्यटन विभाग ने जनपद बस्ती के 34 प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए रुपये 5180.87 लाख स्वीकृत किए हैं। वर्तमान मे कुल 53 परियोजनाए पूर्ण की जा चुकी है। शेष 7 प्रगतिशील है। इस योजना अंतर्गत जनपद के विभिन्न धार्मिक/प्राकृतिक/सांस्कृतिक धरोहरों मे आने वाले पर्यटकों हेतु अवस्थापना सुविधाओ का विकास किया गया है।
जनपद के प्रमुख पर्यटन स्थल मखौड़ा धाम मंदिर, राम रेखा मंदिर, हनुमान बाग चकोही, भदेश्वरनाथ मंदिर, चंदो ताल, वन विहार आदि।
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