प्रदेश में संग्रहालयों के विस्तार को मिलेगा नया आयाम, संस्कृति विभाग ने 17 नई परियोजनाएं कीं प्रस्तावित

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, ऐतिहासिक धरोहरों के संवर्धन और नई पीढ़ी को प्रदेश की गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने की दिशा में संस्कृति विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संस्कृति विभाग द्वारा संग्रहालयों की स्थापना, विकास, उच्चीकरण, नवीनीकरण और क्यूरेशन कार्य से जुड़ी 17 नई परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जनपदों में संग्रहालयों का विकास किया जाएगा, जहां स्थानीय इतिहास, दुर्लभ वस्तुओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं प्रदर्शित किया जाएगा।यह जानकारी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को दी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना और नई पीढ़ी को अपने इतिहास, साहित्य, लोक संस्कृति तथा गौरवशाली परंपराओं से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि कुछ परियोजनाओं से संबंधित निर्णय शासन स्तर पर लंबित हैं, जिनका शीघ्र निस्तारण कर आगे की कार्रवाई प्रारंभ कर दी जाएगी।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया कि जनपद गोरखपुर में गौरव संग्रहालय के क्यूरेशन कार्य के लिए 22 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि प्रस्तावित की गई है। वहीं कन्नौज में बाल संग्रहालय की स्थापना और क्यूरेशन के लिए 15 करोड़ रुपये, फर्रुखाबाद में संग्रहालय स्थापना एवं क्यूरेशन कार्य के लिए 24 करोड़ 50 लाख रुपये तथा कासगंज में पुरातत्व संग्रहालय की स्थापना के लिए लगभग 16 करोड़ 82 लाख रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अलावा झांसी के चिरगांव में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के संग्रहालय एवं पुस्तकालय की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।जयवीर सिंह ने बताया कि सोनभद्र में संग्रहालय स्थापना के लिए 1 करोड़ 33 लाख 55 हजार रुपये की अनुमानित धनराशि निर्धारित की गई है। वहीं राज्य संग्रहालय, लखनऊ के उच्चीकरण, नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए नई मांग के तहत 150 करोड़ रुपये तथा राज्य संग्रहालय, मथुरा के लिए 100 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। चित्रकूट स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम, लालापुर में संग्रहालय क्यूरेशन कार्य के लिए 5 करोड़ रुपये तथा राजापुर स्थित संत तुलसीदास की जन्मस्थली तुलसीपीठ एवं तुलसी स्मारक के पर्यटन विकास और क्यूरेशन के लिए भी 5 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि आजमगढ़ स्थित हरिऔध कला केंद्र में संग्रहालय और पुस्तकालय की स्थापना तथा क्यूरेशन कार्य के लिए 5 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। इसके अतिरिक्त लखनऊ में गुरु गोविंद सिंह स्मृति संस्थान एवं ऐतिहासिक स्मारक ‘विरासत-ए-खालसा’ के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये तथा मानव संस्कृति विकास संग्रहालय के लिए 25 करोड़ रुपये की धनराशि प्रस्तावित की गई है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि बलिया, अलीगढ़, सहारनपुर और बरेली में भी संग्रहालयों की स्थापना को लेकर उच्च स्तर पर कार्रवाई जारी है। आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण होते ही इन परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।उन्होंने कहा कि संग्रहालयों की स्थापना और विकास से स्थानीय इतिहास, पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं तथा सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। साथ ही नई पीढ़ी को प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी विकसित होगा।