समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी ने समाज की एकजुटता पर दिया जोर, दर्शन नगर में गूंजा ‘जय परशुराम’

 

भगवान परशुराम जयंती पर उमड़ा जनसैलाब; सुशील चतुर्वेदी बोले- अन्याय के विरुद्ध शौर्य के प्रतीक हैं भगवान परशुराम

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। धर्मनगरी के दर्शन नगर क्षेत्र में भगवान परशुराम जयंती के पावन अवसर पर भव्य पूजन एवं जनसभा का आयोजन किया गया। भक्ति और उत्साह के इस संगम में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने शिरकत की। कार्यक्रम में समाज की एकता और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रसिद्ध समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने सफल आयोजन के लिए आयोजकों और संत-महात्माओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान परशुराम केवल एक आराध्य देव ही नहीं, बल्कि वे धर्म, न्याय और अदम्य शौर्य के साक्षात प्रतीक हैं। नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना आवश्यक: सुशील चतुर्वेदी सभा को संबोधित करते हुए सुशील चतुर्वेदी ने कहा भगवान परशुराम का जीवन हमें सिखाता है कि जब-जब समाज में अन्याय बढ़ेगा, तब-तब संस्कारों और सत्य की रक्षा के लिए हमें निडर होकर खड़ा होना होगा। आज के कठिन समय में उनके आदर्शों को अपनाना समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए अनिवार्य है। सांस्कृतिक विरासत से नई पीढ़ी का जुड़ाव सुशील चतुर्वेदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम (सेतु) हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज और अधिक सशक्त एवं संगठित बनेगा। धार्मिक अनुष्ठानों से गुंजायमान हुआ क्षेत्र कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। स्थानीय संतों के सानिध्य में हुए इस पूजनोत्सव में श्रद्धालुओं ने ‘जय परशुराम’ के जयघोष से पूरे दर्शन नगर को गुंजायमान कर दिया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति, प्रबुद्ध वर्ग और बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।