अक्षय तृतीया* – 19 अप्रैल परशुराम जन्मोत्सव पर विशेष

*अक्षय तृतीया* – 19 अप्रैल परशुराम जन्मोत्सव पर विशेष

 

*भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की गाथा*

 

*अनमोल कुमार*

 

परशुराम जन्मोत्सव गाथा एक पौराणिक कथा है जो भगवान परशुराम के जन्म और उनके जीवन के बारे में बताती है।

 

*परशुराम का जन्म*

 

परशुराम का जन्म महर्षि जमदग्नि और रेणुका के घर अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। उनके पिता जमदग्नि एक महान ऋषि थे और उनकी माता रेणुका एक पवित्र और धर्मपरायण महिला थीं।

 

*परशुराम की शिक्षा*

 

परशुराम ने भगवान शिव से एक दिव्य परशु (अक्ष) प्राप्त किया था, जो उनकी शक्ति और तेज का प्रतीक था। उन्होंने अपने पिता से शिक्षा प्राप्त की और एक महान योद्धा बने।

 

*परशुराम का विवाह*

 

परशुराम का विवाह धीरा से हुआ था, जो एक पवित्र और धर्मपरायण महिला थीं।

*परशुराम ने 21 बार अत्याचार के विरुद्ध क्षत्रियों का संहार किया*

 

परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों का संहार किया था, क्योंकि वे पृथ्वी पर अत्याचार और अन्याय कर रहे थे। क्षत्रिय राजाओं ने अपने शासन में ऋषि मुनियों और अन्य लोगों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था और धर्म की अवहेलना कर रहे थे।

हैहय राजाओं ने अपने शासन में अत्याचार किया और ब्रह्मणों को परेशान किया।

कीर्तवीर्य अरूजुन ने जमदग्नि ऋषि की हत्या कर दी, जिससे परशुराम क्रोधित होकर प्रतिशोध लिया।

क्षत्रियों के राजाओं ने अपने शासन काल में लोगों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था और धर्म की अवहेलना कर रहे थे।

 

*परशुराम का संहार*

परशुराम ने इन अत्याचारों को रोकने के लिए 21 बार क्षत्रियों का संहार किया और क्षत्रियों को सबक सिखाते हुए धर्म की रक्षा की।

 

*सीता स्वयंवर में राम द्वारा धनुष टंकण परशुराम संवाद*

 

धनुष टंकण के बाद राम और परशुराम के बीच एक प्रसिद्ध संवाद हुआ, जो रामायण में उद्धृत है। क्रोधित परशुराम ने कहा कि तुम कौन हो? तुमने मेरे अराध्य देव शिव के धनुष टंकण किया है जो बहुत बड़ा अपराध है।

श्री राम ने कहा कि मैं राजा दशरथ का पुत्र राम हूँ। मैंने धनुष टंकण किया है। जो अपराध नही है। परशुराम ने कहा कि तुमने मेरा धनुष टंकण किया है, इसलिए तुम्हें मेरे साथ युद्ध करना होगा। राम ने कहा कि युद्ध के लिए मै तैयार हूँ परन्तु यह बताएं कि आपका धनुष इतना शक्तिशाली क्यों है?

परशुराम ने कहा यह धनुष भगवान शिव का है जिसने गुरु बनकर मुझे शिक्षा दी। इसलिए जो शिव भक्त है वही इसका उपयोग कर सकता है। राम ने कहा मैं भी शिव भक्त हूँ इसलिए इस धनुष का उपयोग कर सकता हूँ, तब प्रसन्न होकर परशुराम ने राम को आशीर्वाद दिया और कहा कि तुम ईश्वर के अवतार हो । तुम्हारी भक्ति और शक्ति देखकर मैं प्रसन्न हूँ।

 

*मोकामा में परशुराम की तपस्या और कथा*

 

परशुराम ने मोकामा में स्थित परशुराम मंदिर में भगवान शिव की आराधना की थी। उन्होंने अपनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया और उनसे एक दिव्य परशु प्राप्त किया। मोकामा स्थित परशुराम स्थान में एक दिन जब पूजारी पूजा, अर्चना और आरती कर रहे थे, तो मीठापुर से मियां मिट्ठू जो कट्टर मुस्लिम राजा था, उसने बोला यह सब ढोंग है अगर इनमें शक्ति है तो मैं एक गाय को कटवाता हूँ, उसे जीवित कर दे। पूजारी ने ध्यान लगाकर कहा, ठीक है। उसने गाय का गर्दन काटवा कर छोड़ दिया। पूजारी ने गाय का गर्दन जोड़कर लाल वस्त्र से ढ़क दिया और मंत्रोच्चारण करने लगा। काफी समय बाद गाय जीवित अवस्था में उठ खड़ा हुआ। तभी आकाश वाणी हुई कि अब लोग मेरा परीक्षा लेने लगे, इसलिए मैं यहाँ से जा रहा हूँ परन्तु जबतक पीपल का बृक्ष यहाँ हराभरा रहेगा। मेरी आत्मा यहाँ वास करेगा। पहले छत्रपुरा का नाम मीठापुर ही था, जब धीरे धीरे मियां मिट्ठू का वंश समाप्त हो गया और भगवान परशुराम की छत्रछाया यहाँ पड़ा इस जगह का नाम मीठापुर से छत्रपुरा पड़ गया। मोकामा वासी इन्हें अपने कुलदेवता और ग्राम देवता के रूप में सदा पूजते आ रहे हैं। यहाँ प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया में परशुराम जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया है जहाँ लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इस अवसर पर जनजागरण हेतु मोटर साइकिल जुलूस, गंगा नदी से क्लश भरकर हजारों की संख्या में क्लश यात्रा, परशुराम महायज्ञ, प्रवचन, भजन कीर्तन, भण्डारा का व्यस्था रहता है।

 

*परशुराम जन्मोत्सव*

 

परशुराम जन्मोत्सव हर साल अक्षय तृतीया के अवसर पर रथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान परशुराम के जन्म की खुशी में पूजा-अर्चना की जाती है और उनके जीवन के बारे में बताया जाता है।