कविता: “पधारो रामदूत हनुमान”
पधारो रामदूत हनुमान, मेरे मन के आंगन में आज।
भक्ति दीप जलाऊँ मैं, करूँ चरणों में विनम्र साज।
पवनसुत बल के सागर, संकट हरने वाले वीर।
तेरी कृपा से मिट जाए, जीवन का हर एक पीर।
लाल ध्वजा संग तुम आओ, बजते हों जयकारे।
तेरे नाम से खिल उठें, सूने मन के द्वारे।
राम नाम के रक्षक तुम, भक्तों के हो आधार।
तुम बिन सूना हर क्षण, तुमसे जीवन साकार।
गदा उठाए दुष्ट हरते, धर्म की ज्योति जलाते।
सीता राम के दास बन, जग में प्रेम फैलाते।
मेरे मन मंदिर में आओ, बैठो प्रेम के साथ।
हर अंधियारा दूर करो, दिखलाओ सच्चा पथ।
भक्ति की वर्षा कर दो, मन निर्मल हो जाए।
तेरे चरणों में झुककर, हर भय दूर हो जाए।
जय बजरंग बली की ध्वनि, गूँजे हर एक प्राण।
पधारो रामदूत हनुमान, करो जीवन कल्याण।
राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम
छत्तीसगढ़