वशिष्ठ धाम में भव्य प्राण प्रतिष्ठा: जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य के करकमलों से हुआ पावन अनुष्ठान 

वशिष्ठ धाम में भव्य प्राण प्रतिष्ठा: जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य के करकमलों से हुआ पावन अनुष्ठान

 

महर्षि वशिष्ठ, माता अरुंधति सहित राम दरबार के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा

 

बस्ती। वशिष्ठ धाम में उस समय भक्तिमय वातावरण का सृजन हो गया जब पूज्य श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के करकमलों से प्रभु श्रीराम के कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ जी, माता अरुंधति जी, विद्यार्थी रूप में श्रीराम, भरत जी, लक्ष्मण जी एवं शत्रुघ्न जी तथा दामोदर बाबा के सुंदर विग्रहों की विधि-विधानपूर्वक प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तों के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया।

प्राण प्रतिष्ठा के इस पावन अवसर पर संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। शशिकांत दूबे, प्रवीण सिंह, साक्षी मिश्रा, लक्ष्मी यादव, कृषा निगम, महक एवं वसुधा सिंह ने बधावा लोकनृत्य प्रस्तुत कर वशिष्ठ धाम वासियों को मंगलकामनाएं और बधाई दी। पारंपरिक वेशभूषा और लोकधुनों पर आधारित नृत्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

भजन संध्या में प्रभा त्रिपाठी ने “कैसे ढूंढूं मैं गुरुवर पता आपका, जिसे जपने से मिल जाए राम” जैसे भावपूर्ण भजन प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। वहीं मोहिनी द्विवेदी ने “राम जी से पूछे जनकपुर के नई लोगवा देते काहे गारी” की प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। लखनऊ से आए श्याम बैरागी ने “राम सिया राम” तथा “मुझे चढ़ गया भगवा रंग” जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को झूमने पर विवश कर दिया। पूरा कथा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो उठा।

कार्यक्रम संयोजक दिनेश प्रताप सिंह ने सभी कलाकारों को गुरुजी की प्रतिमा स्वरूप स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और उनका उत्साहवर्धन किया। सांस्कृतिक संध्या का संचालन प्रभारी मास्टर शिव ने कुशलता पूर्वक किया।

इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया बल्कि सांस्कृतिक परंपराओं को भी नई ऊर्जा प्रदान की। श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया।