राजीव दीक्षित चिकित्सालय में रीढ़ की एंडोस्कोपी से रचा गया कीर्तिमान

राजीव दीक्षित चिकित्सालय में रीढ़ की एंडोस्कोपी से रचा गया कीर्तिमान

 

शक्ति शरण उपाध्याय

 

बस्ती। हरैया क्षेत्र के तेनुआ स्थित राजीव दीक्षित चिकित्सालय में रीढ़ (स्पाइन) के अत्याधुनिक एंडोस्कोपी उपचार के माध्यम से कमर और गर्दन में दबी नस की समस्या का सफल इलाज कर एक नई उपलब्धि हासिल की गई है। अस्पताल के दर्द एवं रीढ़ रोग विशेषज्ञ डॉ. बृहस्पति तिवारी ने एंडोस्कोपी तकनीक से जटिल मामलों का सफल उपचार कर बस्ती मंडल का नाम रोशन किया है। विशेषज्ञों के अनुसार हाथ या पैर में दर्द, झुनझुनी, फटन, भारीपन, सुन्नपन या मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण नस दबने के संकेत हो सकते हैं। यह समस्या कमर या गर्दन में डिस्क उभार अथवा रीढ़ की नलिका संकुचन (स्पाइनल स्टेनोसिस) के कारण उत्पन्न होती है। हरैया क्षेत्र के ग्राम तुर्कीपुर देवखर की 80 वर्षीय प्यारी देवी पिछले तीन महीनों से बाएं पैर में तेज दर्द और सुन्नपन से पीड़ित थीं। वह चलने-फिरने और उठने-बैठने में असमर्थ हो गई थीं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि शौच और पेशाब के लिए भी उन्हें बिस्तर का सहारा लेना पड़ रहा था। अधिक आयु और अन्य स्वास्थ्य कारणों से वह पारंपरिक बड़े ऑपरेशन के लिए उपयुक्त नहीं थीं।

डॉ. बृहस्पति तिवारी ने एंडोस्कोपी विधि से उपचार का भरोसा दिलाया। जांच में महिला को कमर के दो स्तर पर रीढ़ की नलिका संकुचन की समस्या पाई गई। मात्र पांच मिलीमीटर के छोटे चीरे से एंडोस्कोपिक प्रक्रिया कर दबी नस को सफलतापूर्वक मुक्त किया गया। उपचार के दौरान मरीज होश में रहीं और स्क्रीन पर नस को दबावमुक्त होते देखती रहीं।

ऑपरेशन के बाद मरीज को तुरंत राहत मिली। अगले ही दिन वह बिना दर्द के चलने लगीं और पैरों में हल्कापन महसूस करने लगीं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इस तकनीक से मरीज सामान्यतः दो से तीन दिनों में अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अब यहां किसी भी आयु वर्ग के मरीजों का रीढ़ संबंधी रोगों का अत्याधुनिक दर्द चिकित्सा एवं एंडोस्कोपी तकनीक से संपूर्ण उपचार संभव है। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि पूरे बस्ती मंडल के लिए गर्व का विषय