शीर्षक: फरवरी का महीना
फ़रवरी का महीना आया,
खुशियों और प्यार का पैगाम लाया।
बारह भाई-बहनों में सबसे छोटी,
लाडली है यह, सबसे प्यारी-छोटी।
मगर इसी महीने का एक पन्ना भारी है,
जिस पर लिखी शहादत की कहानी न्यारी है।
कैसे भूलें वो 14 फरवरी का काला दिन,
जब सन्नाटा छा गया था वीर जवानों के बिन।
जिसने चालीस (40) जांबाज वतन के खोए थे,
उस दिन आसमान के साथ, पत्थर भी रोए थे।
कितने नए जोड़े बिछड़े, कितनी सगाई टूटी थी,
कितनों की मेहंदी रचने से पहले ही छूटी थी।
किसी के आंगन में गूंजने वाली थी किलकारी,
पर बीच राह में रुक गई, जीवन की ये सवारी।
वादा था कि “अबकी बार आऊंगा” माँ से कहा था,
तिरंगे में लिपटकर वो वीर, अपने घर को चला था।
पतझड़ के बाद जो ये नई आशा है लाती,
वो उन वीरों के लहू से ही दुनिया को सजाती।
फरवरी का प्यार बस गुलाबों तक नहीं है सीमित,
उन शहीदों के त्याग से है ये सारा देश जीवित।
कवयित्री ज्योती वर्णवाल
नवादा (बिहार)