मन के टीचर बनना: आत्म-नियंत्रण और जागरूकता की कला – डॉ नवीन योगी

मन के टीचर बनना: आत्म-नियंत्रण और जागरूकता की कला – डॉ नवीन योगी

बस्ती। आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में मन को साधना सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि हमारा अपना मन ही अक्सर हमारे सुख-दुख का कारण बनता है। यदि व्यक्ति अपने मन का मार्गदर्शन करना सीख ले, तो वह जीवन की हर परिस्थिति में संतुलित और प्रसन्न रह सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर संकल्प योग वैलनेस सेंटर के योगाचार्य डॉ. नवीन योगी ने “मन के टीचर” बनने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

डॉ. नवीन योगी के अनुसार, मन का टीचर बनने के लिए सबसे पहले ध्यान का अभ्यास आवश्यक है। नियमित ध्यान से मन शांत होता है और विचारों की चंचलता कम होती है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है आत्म-जागरूकता—अपने विचारों, भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को समझना। जब व्यक्ति यह जान लेता है कि उसके मन में क्या चल रहा है, तब वह उसे सही दिशा दे सकता है।

उन्होंने बताया कि सही निर्णय लेना भी मन के शिक्षक बनने की प्रक्रिया का अहम भाग है। जब निर्णय अपने मूल्यों और लक्ष्यों के अनुरूप होते हैं, तो मन भटकता नहीं। इसके साथ-साथ आत्म-नियंत्रण का अभ्यास आवश्यक है, जिससे नकारात्मक विचारों और भावनाओं पर विजय पाई जा सके।

अंत में डॉ. योगी ने कहा कि मन को साधने की यह यात्रा तुरंत पूरी नहीं होती। इसके लिए धैर्य और संयम अनिवार्य हैं। निरंतर अभ्यास, सकारात्मक सोच और योग-ध्यान के माध्यम से हर व्यक्ति अपने मन का टीचर बन सकता है और जीवन को अधिक सार्थक बना सकता है।

— डॉ. नवीन योगी

संकल्प योग वैलनेस सेंटर, बस्ती