
किसी से दिल लगाया जा रहा है
किसी का दिल दुखाया जा रहा है
मैं वो बेजान-सा रिश्ता हुआ हूं
जिसे जबरन निभाया जा रहा है
ग़ज़ल के नाम पर कोई बताये
किसे ओढा बिछाया जा रहा है
ये ज़िंदा लोग सारे सो गए क्या
जो मुरदों को जगाया जा रहा है
दिखाकर खूबसूरत ख़्वाब हमको
हक़ीक़त को छिपाया जा रहा है
अंधेरे आ गए हैं आज ज़िद पर
“किरण”को आज़माया जा रहा है
©डॉ कविता”किरण”
(ग़ज़ल संग्रह “उफ़” से)