महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। श्रीराम गौशाला समिति, कारसेवकपुरम (विश्व हिन्दू परिषद) के तत्वावधान में गोपाष्टमी पर्व के अवसर पर गौमाता पूजनोत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें धार्मिक उत्साह, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य इन्द्र देव मिश्रा जी की टीम द्वारा गो पूजन, आरती और गो-ग्रास प्रसाद वितरण से किया गया। गौसेवा भारतीय संस्कृति की आत्मा मान्यवर दिनेश चन्द्र जी इस अवसर पर विहिप केंद्रीय संरक्षक एवं वरिष्ठ प्रचारक मान्यवर दिनेश चन्द्र जी ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि, “गोवंश भारतीय संस्कृति की आत्मा है। गोसेवा न केवल धार्मिक कर्तव्य है बल्कि सामाजिक और आर्थिक उत्थान का आधार भी है। कार्यक्रम में अयोध्या मण्डलायुक्त श्री राजेश जी, पूज्य महंत वैदेही शरण जी महाराज, विहिप केंद्रीय मंत्री श्री राजेन्द्र सिंह ‘पंकज’ जी, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री श्री वेंकट कोटेश्वर राव शर्मा जी, क्षेत्र संगठन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह जी, तथा पूर्व सांसद श्री लल्लू सिंह जी सहित अनेक संत, पदाधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। अयोध्या जल पुलिस टीम को विशेष सम्मान गौशाला समिति एवं विश्व हिन्दू परिषद द्वारा अयोध्या जल पुलिस को सरयू नदी में श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किए गए उत्कृष्ट कार्य की सराहना करते हुए विशेष सम्मान प्रदान किया गया। जल पुलिस द्वारा अब तक 900 से अधिक दर्शनार्थियों को डूबने से बचाया गया है। सम्मानित होने वालों में जल पुलिस प्रभारी रूबे प्रताप मौर्य, कांस्टेबल नित्यानंद यादव, कांस्टेबल सुरेन्द्र यादव, तथा वरिष्ठ अधिकारी उमेश पोरवाल शामिल रहे। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के गोपालक सम्मानित
विहिप 84 कोसी परिक्रमा प्रमुख सुरेन्द्र सिंह जी की पहल पर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के ग्रामीण गोपालकों को भी क्षेत्र संगठन मंत्री गजेन्द्र सिंह जी और अन्य पदाधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, जीव दया, पर्यावरण संरक्षण और गोसंरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों को भी पूज्य महंत वैदेही शरण जी महाराज और अयोध्या पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विजय यादव द्वारा सम्मानित किया गया। गौशाला प्रबन्धक पुरुषोत्तम नारायण सिंह जी ने सभी आचार्यों, गोसेवकों और अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का समापन गौमाता आरती एवं “जय श्रीराम” के उद्घोष के साथ हुआ। संपूर्ण आयोजन में श्रद्धा, अनुशासन और सेवा का सुंदर समन्वय दिखाई दिया।