
अयोध्या
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी जी ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि “हर व्यक्ति के जीवन में एक गुरु का होना अनिवार्य है। गुरु अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले पथ प्रदर्शक होते हैं। वे केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को दिशा भी देते हैं।”
सुशील चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में अयोध्या सहित बिहार के विभिन्न जिलों में गुरु पूर्णिमा को समर्पित विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों के माध्यम से गुरुजनों को सम्मानित किया जाएगा तथा उनके योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
चतुर्वेदी ने कहा कि “गुरु पूजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह एक भाव है—आभार का, श्रद्धा का और प्रेरणा का। समाज में यदि हम गुरु की महत्ता को सही रूप में समझें और अपनाएं, तो अनेक समस्याओं का समाधान संभव है।”
इस अवसर पर स्थानीय सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों एवं युवाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। समाजसेवी चतुर्वेदी जी का यह प्रयास न केवल गुरु परंपरा को जीवित रखने की दिशा में सराहनीय कदम है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की पहल भी है।