*गायत्री कथा पंचम दिवस*

ओ३म् 🔥🔥
*गायत्री कथा पंचम दिवस*
आर्यावर्त्त साधना सदन दशहरा बाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश में चल रही *पावन गायत्री कथा* के अवसर पर आज ईश्वर के *न्यायकारी गुण का व्यावहारिक रुप* को समझाया गया।
कथा के आचार्य ने बताया कि यदि भारत सरकार के *प्रथम स्तर के अधिकारी,न्यायाधीश,सत्ताधारी व समस्त विपक्षी राजनीतिक पार्टियां* ईश्वर के न्यायकारी गुण को समझ झायें तो देश में कभी भी *अस्थिरता,अराजकता,आतंकवाद,चोरी,लूट,भ्रष्टाचार का वातावरण पैंदा* ही नहीं होगा।ईश्वर के न्याय के मुख्य *दश नियम* हैं।
*[१]* अच्छे कर्म का फल सुख ईश्वर देता है।
*[२]* बुरे कर्म का फल ईश्वर दु:ख देता है।
ये नियम सब पर लागू होते हैं चाहे *राजा हो या प्रजा।अधिकारी हो या कर्मचारी।न्यायाधीश हो या अपराधी* इन नियमों को बनाने वाला न्यायकारी ईश्वर है!
*[३]* कर्म नहीं तो फल भी नहीं।
*[४]* जितना कर्म उतना ही फल!
*[५]* जिसने कर्म किया है फल भी उसी को मिलेगा!
*[६]* पहले कर्म होता है बाद में फल मिलता है।
*[७]* कर्म का फल मांफ नही होता चाहे वो कानून बनाने वाला ही क्यों न हो!
*[८]* कर्म को ठीक-ठीक जाने बिना फल नहीं दिया जा सकता!
*[९]* अधिकृत व्यक्ति ही दंड दे सकता है।
*[१०]* कर्त्ता को ही फल मिलेगा साधन को नहीं।
🪷 *विशेष ज्ञातब्य*🪷
नियम संख्या *७,८,९* का बड़े-बड़े विधि के ज्ञाता व प्रथम श्रेणी के अधिकारी व बाहुबली व राजनेता करते हैं।अत: इनको दंड *स्वयं परमात्मा* देता है।परमात्मा का दंड मनुष्य के दंड से करोड़ों गुना भयानक होता है।अत: दंड देने वालों को *ईश्वर के न्यायकारी गुण* को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए क्योंकि *ईश्वर हमारे प्रत्येक कर्म को देख रहा है,सुन रहा है,जान रहा है*।
आप इस पावन गायत्री कथा को हमारे यू टूयूब चैनल 🌻 *अक्षर ओ३म्*🌻 पर भी प्रतिदिन देख व सुन सकते हैं।
🌹 *आज के भजन*🌹
आज कुमारी आरोही।सरस्वती देवी।अर्जुन यादव जी ने वैदिक भजन सुनाकर सबको भक्ति रस का पान कराया!
*आचार्य सुरेश जोशी*