संपूर्ण रामायण पर रचित पंक्तियां – मुकेश “कविवर

संपूर्ण रामायण मात्र 42 पंक्तियों में

श्रेष्ठ है जग में वाल्मीकि तुलसी का नाम।

सिखा दिया जिन्होंने जपना सदा राम का नाम।। हर क्षण बोलो जय श्री राम…

अयोध्या जन्मे राम लखन भरत शत्रुघ्न चार भाई।

दशरथ संग कौशल्या सुमित्रा कैकई हर्षाई।।

जिनसे प्रसिद्ध रघुकुल का नाम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

गुरु विश्वामित्र से शिक्षा पाई, मन चित से पूरी की पढ़ाई।

शौर्य दिखा ताड़का मारी, दयावान हो अहिल्या तारी।।

ऊंचा किया गुरु का नाम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

जनकपुर रघुनंदन आए, नगरवासी दर्शन पाए।

प्रभु ने धनुष चढ़ाया, सब राजाओं का मान घटाया।।

सीता ने पाए राम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

परशुराम क्रोधित हो आए, लक्ष्मण शांत बैठ न पाए।

पुकारा उन्हें पाखंडी अभिमानी, क्षमा मांगी राम ने हो ज्ञानी… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

चारों भाई बारात ले आए, सीता मांडवी श्रुतकीर्ति उर्मिला मन भाए।

अवधपुरी विदा कर लाए, मंगल गीत और ढोल बजाए… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

राम तिलक आज्ञा वशिष्ठ से मांगी, सुन मंथरा बात केकई बखानी।

दे दो दशरथ दो वरदान, रख लो अपने कुल की आन।

राम वनवास, राज करो भरत के नाम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

माता पिता इच्छा, आज्ञा मानी वन गए राम सीता रानी।

हुए व्याकुल अवधवासी, गए बैकुंठ दशरथ हुई विधवा सब रानी।

मचा अवध में अति कोहराम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

गंगा तट केवट चरण धुलाए, राम लखन सीता तब नाव चढ़ाए।

उतराई में जब मुंदरी दीनी, केवट ने वचन है कीनि।

बेड़ा पार लगाना राम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

केकई को कटु वचन सुनाए, राम लेने भरत चित्रकूट आए।

चरण पादुका राम ने दीनि, भरत दर्शन कर पूजा कीनि।

कंठ लगे भरत से भाई राम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

स्वर्णखा की नाक कटाई, खरदूषण को मार गिराई।

मारीच मृग पीछे राम लखन भागे, साधु वेष धर रावण सीता के आगे।

भिक्षा दो यह धर्म का काम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

भिक्षा लेकर सीता आई, हाथ पकड़ रथ में बैठाई।

लक्ष्मण गर सीता छोड़ न जाते, जनक दुलारी हम न गंवाते।

हे! प्रिय सीते… चीखे राम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

ढूंढते ढूंढते फल सबरी के खाए, विप्र रूप धर हनुमत आए।

गरुड़ ने जीवन सफल बनाई, सिंहासन सुग्रीव ने पाई।

बाली पहुंचाया निजधाम… हर क्षण बोलो जय श्री राम…

सीता लाने सागर में कूदे हनुमान, विभीषण ने किया जिन्हें प्रणाम।

वृक्ष तले सीता को पाया, राम मुंदरी दे उन्हें बताया।

मेरे तन मन धन है राम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

फल खाकर वृक्ष उखाड़े, देख देख माली ललकारे।

सीता लौटा दे समझाया, नहीं तो देख काल तेरा आया।

तिहू लोक के स्वामी राम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

तब लंका में आग लगाई, सागर में जा पूंछ बुझाई।

राम लखन सहित तट पर आए, वानर रीछ संग में लाए।

लंका पहुंचे राजा राम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

इंद्रजीत ने शक्ति चलाई, मूर्छित भए लक्ष्मण भाई।

संजीवनी बूटी पर्वत लाए हनुमान, संकट मोचन जिनका नाम।

हनुमंत कंठ लगाए राम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

कुंभकरण उठकर तब आया, एक बाण से उसे गिराया।

इंद्रजीत पहुंचाया धाम, हर मुख से निकला जय जय राम।

पतित पावन सीता राम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

रावण का अभिमान चूर कर दीना, गिरा भूमि परमधाम दीना।

भय से मुक्त हुई धरा, स्वच्छ हुई चहुं और दिशा।

हर कोई बोले जय सिया राम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

सीता ने हरि दर्शन कीना, अग्नि परीक्षा उत्तीर्ण कर लीना।

पुष्पक ने अयोध्या पहुंचाया, भरत मिल सिंहासन बैठे रघुराया।

माताओं को किया प्रणाम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

धोबी कहने पर सीता त्यागी, विश्वास प्रजा का राम ने जीता।

वाल्मीकि आश्रम हुए दो भाई, जिनकी माता जानकी माई।

पुत्रों से दूर रहे श्री राम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

राम का अश्व लव कुश पकड़ा, सीता मिल मिटा सब दुखड़ा।

सीता राम बिन अकुलाई, भूमि से यह विनय सुनाई।

मुझको अब दे दो विश्राम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

राम लीला ‘कविवर केशव’ ने सुनाई, सबकी विनती सुने रघुराई।

नित्य जपे जो राम का नाम, सफल होंगे उसके सब काम।

पतित पावन सीता राम … हर क्षण बोलो जय श्री राम…

“आरती प्रभु श्री राम की”

जय श्री राम…

जय सीता राम…

प्रभु की महिमा अपरंपार…

कविवर केशव की वाणी से निकले,

राम नाम जपने से सुख मिले…

दुख दर्द सब दूर हो जाएं,

प्रभु की कृपा से जीवन सजता…

पतित पावन सीता राम… 

हर क्षण बोलो जय श्री राम…

कविवर केशव की आरती…

स्वीकार करो हे राम…

स्वरचित (कॉपी राइट)

मुकेश “कविवर केशव” सुरेश रूनवाल